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पांच राज्यों के चुनावी नतीजे से तय होगा 2024 में केंद्र में किसकी बनेगी सरकार

- भाजपा को प्रधानमंत्री मोदी का सहारा, कांग्रेस स्थानीय क्षत्रपों के भरोसे
रितेश सिन्हा (वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक)।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्यों में चुनाव प्रस्तावित है, उन पर इन तीन राज्यों में भाजपा और कांग्रेस का पूरा फोकस येन-केन प्रकारेण सरकार बनाने का पूरा दवाब है। भाजपा जहां सत्तारूढ़ दल कांग्रेस की छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकार चल रही है, उसको सत्ता से बेदखल करने की कोशिशों में पूरी ताकत झोक रही है। वहीं कांग्रेस इंडिया गठबंधन में अपना दबदबा कायम रखने के लिए पूरी ताकत लगाए हुए है। इन दोनों प्रदेशों में कांग्रेस अपनी वापसी करने में जुटी है, वहीं मध्य प्रदेश में भाजपा को पछाड़ते हुए सरकार बनाने की फिराक में हैं। इन पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद इंडिया गठबंधन में सीटों के बंटवारे पर गठबंधन में अधिक से अधिक सीटें कांग्रेस अपने पाले में झटकने की कोशिशों में हैं।
मध्य प्रदेश की बात करें तो कांग्रेस यहां भाजपा पर अपनी बढ़त बनाए हुए दिख रही है। क्योंकि पिछले सत्ता परिवर्तन में कांग्रेस अपने गठबंधन के साथ प्रदेश से भाजपा की विदाई कर चुकी थी। मगर स्थानीय नेताओं की हठधर्मिता और एक-दूसरे की काट-छांट की बड़ी वजह से कांग्रेस और कमलनाथ को सत्ता से बाहर जाना पड़ा और शिवराज के नेतृत्व एक बार फिर भाजपा की सरकार बनी जिसमें ज्योतिरादित्य की बड़ी भूमिका सामने आई। भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आए सिंधिया को राज्यसभा में भेजा और केंद्र में मंत्री पद से भी नवाजते हुए केंद्रीय सरकार का हिस्सा बना दिया। सिंधिया ने कांग्रेस में अपने विरोधियों को इस दल-बदल के साथ दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों को राजनीतिक झटका दे दिया था। 2020 में हुए इस बदलाव का बदला लेने के लिए कमलनाथ कड़ा संघर्ष करते हुए भाजपा के खिलाफ माहौल बनाते आ रहे हैं।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस में सत्ता का संघर्ष कमलनाथ और दिग्विजय के बीच दिखाई दे रहा है। कमलनाथ और दिग्विजय दोनों ने प्रभारी रहे जय प्रकाश अग्रवाल को हटवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जयप्रकाश इन दोनों खेमों में बंटी कांग्रेस को एकजुट करने के साथ-साथ प्रदेश के अन्य बड़े नेताओं की भी भागीदारी को सुनिश्चित करना चाहते थे ताकि मध्य प्रदेश में पूर्ण बहुमत से कांग्रेस की सरकार बन सके। ऐसे नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह जो विपक्ष में सदन के नेता भी रहे हैं। उनके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री व आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया, पूर्व सांसद रामेश्वर मिश्रा समेत एक दर्जन नेता जो अपने-अपने जिलों में खासा प्रभाव रखते थे, इनको भी साथ लेने की कवायद में जय प्रकाश को पद से हाथ धोना पड़ा।
जय प्रकाश के प्रयासों को भले ही इन दो नेताओं ने झटका देने का प्रयास किया, मगर मध्य प्रदेश के कांग्रेसियों में जय प्रकाश की लोकप्रियता कम नहीं हुई। उनके लगातार प्रयासों में कांग्रेस को हर विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के मुकाबले बढ़त दिला दी थी। कई चैनलों और चुनावी सर्वे में आज जो बढ़त दिखाई दे रही है, उसमें स्थानीय नेताओं के अलावा जय प्रकाश अग्रवाल का भी बड़ा योगदान है। नवनियुक्त प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला अभी तक अनेक जिलों में जा चुके हैं मगर किसी एक विधानसभा में भी अपना प्रभाव छोड़ने की स्थिति में नहीं रहे। मध्य प्रदेश विधानसभा की कुल 230 सीटों में जिनमें बहुमत का आंकड़ा 116 सीटों का बनता है। चैनलों के द्वारा चलाए गए लगभग सभी चुनावी सर्वेक्षणों में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत से सरकार आती दिख दे रही है।
इन सर्वेक्षणों के नतीजों के अनुसार 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को 118-128 और भाजपा को 102-110 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है। वहीं अन्य को भी 2 सीटें मिलने की संभावना सर्वे बता रहा है। मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 38 सीटों में से भाजपा को 18-22 व कांग्रेस को 16-20 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है। वहीं ग्वालियर-चंबल संभाग में आने वाली 34 सीटों में कांग्रेस को 26-30 और भाजपा को 4-8 सीटों पर अटक रही है। मध्य प्रदेश का मध्य क्षेत्र जिसमें कुल 36 सीटें आती हैं, इनमें भाजपा को 22-24 सीटें कांग्रेस के खाते में 12-14 सीटें मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है। बुंदेलखंड संभाग के अंतर्गत आने वाली 26 सीटों में से भाजपा को 13-15 व कांग्रेस के खाते में 11-13 सीटें मिलती दिख रही है।
मध्य प्रदेश के विंध्य संभाग में भाजपा की बढ़त बनी हुई है। यहां की 30 सीटों में से भाजपा को 19-21 सीटें व कांग्रेस को 8-10 सीटें मिलने की संभावना जतायी जा रही है। मालवा संभाग में महाकौशल की तरह कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। यहां की 66 सीटों में से कांग्रेस को 41-45 सीटें और भाजपा को 20-24 सीटों पर सिमटती दिखाई दे रही है। कांग्रेस की सरकार बनाने में महाकौशल और मालवा पर भरोसा है जहां भाजपा पिछड़ती दिख रही है, मगर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ यहां पूरी ताकत लगाने में जुटा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 महीने के भीतर 8 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को विधानसभा में उतारकर कांग्रेस को तगड़ी चुनौती देने की योजना पर अमल शुरू हो चुका है।
छत्तीसगढ़ में विधानसभा की 90 सीटें हैं जहां 46 सीटें लाने वाली दल की सरकार बनती है। चैनलों और सर्वेक्षण करने वाली एजेंसियों के ताजा सर्वे के अनुसार कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाती दिख रही है। कई सर्वे में 90 विधानसभा सीटों में से 50-70 सीटों पर कांग्रेस और 30-35 सीटों पर भाजपा के सिमटने की बात कही जा रही है। प्रदेश में भाजपा फिर एक बार रमण सिंह के साथ चुनाव मैदान में जाना चाहती है। रमण सिंह लगातार तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, मगर पनामा मामले में नाम आने के बाद उनकी राजनीतिक हैसियत में कमी आई और भूपेश बघेल की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार बनी। छत्तीसगढ़ में दोनों दलों में राजपूत बनाम कुर्मी नेताओं के बीच रस्साकसी है। रमण सिंह राजपूत समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि भूपेश बघेल कुर्मी समुदाय से आते हैं। भाजपा के रमेश बैस जो महाराष्ट्र में बतौर राज्यपाल हैं, वो भी अपना दांव लगाना चाहते हैं। आदिवासी, जनजातीय बाहुल्य प्रदेश में इस समुदाय का साथ कांग्रेस को हमेशा से मिलता रहा है। कुर्मी समुदाय अपने साथ न्याय न होता देख कांग्रेसी बघेल के पीछे लामबंद हैं।
राजस्थान की बात करें तो यहां विधानसभा की 200 सीटें हैं। राज्य में बहुमत से सरकार बनाने का आंकड़ा कम से कम 101 सीटों का बनता है। ताजा सर्वेक्षणों में भाजपा और कांग्रेस के बीच बराबरी की टक्कर अब तक दिखाई दे रही है। दोनों ही दलों में असंतुष्टों की भरमार है। कांग्रेस में सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आमने-सामने हैं, वहीं भाजपा में वसुंधरा राजे बनाम केंद्रीय नेतृत्व के बीच खींचतान जारी है। यहां का चुनावी गणित ऐन नतीजों से पहले कुछ भी कहना सर्वेक्षण के बाहर की बात है। दोनों दलों में टिकट बंटवारे के बाद किसी सटीक नतीजों की तरफ बढ़ा जा सकता है। राजस्थान में जिस तरीके का मुकाबला चुनावी सर्वेक्षण के द्वारा बताया जा रहा है, उससे साफ निकल कर आता है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट, भाजपा केंद्रीय नेतृत्व और वसुंधरा राजे, दोनों ही अपनी बनती सरकारों को पलटने का माद्दा रखते हैं।
जहां कांग्रेस सभी प्रदेशों में राहुल-प्रियंका दोनों ने प्रचार को गति दी हुई है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अकेले भाजपा की ताकत बने हुए हैं। टिकट वितरण के बाद ही इन चुनावी सर्वेक्षणों की अहमियत दिखाई देगी कि सरकार बनते देख भाजपा और कांग्रेस दोनों में बड़ी संख्या में बागियों का उतरना तय है, जिससे हार-जीत का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। राजस्थान में दोनों दलों के आलाकमान की छोटी सी चूक भी जीती हुई बाजी को पलट सकती हैं। आपको बता दें कि इन चुनावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस में खासा घमासान चल रहा है, वहीं चुनाव आयोग भी सभी पहलुओं पर नजर रखते हुए तारीखों का जल्द ही ऐलान करेगा।
छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान और मिजोरम में विधानसभा चुनाव की तारीखों का अभी ऐलान होना बाकी है। चुनावों की प्राथमिक तैयारियां आयोग की तरफ से पूरी हो चुकी है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए घोषणाओं का पिटारा खोल दिया है। 2 अक्टूबर को पीएम मोदी राजस्थान और मध्यप्रदेश का दौरा कर चुके हैं। मोदी ने राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में कई विकास योजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास किया। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में विकास योजनाओं की शुरुआत व कई परियोजनाओं के शिलान्यास के साथ जनसभा भी संबोधित कर चुके हैं। पहले ही 30 सितंबर को भी प्रधानमंत्री छत्तीसगढ़ के दौरे पर पर थे। जहां उन्होंने बिलासपुर में एक जनसभा को संबोधित किया। 3 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में रैली होगी। तेलंगाना का दौरा भी प्रधानमंत्री कर चुके हैं। विकास कार्यों की शुरुआत और शिलान्यास भी किया।
5 अक्तूबर को प्रधानमंत्री फिर राजस्थान और एमपी का दौरा करेंगे। राजस्थान में 11 बजे जोधपुर में कार्यक्रम होगा और 12 बजे रैली होगी। पीएम 5 साल बाद राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर पहुंच रहे हैं। इस दौरान वे नई ट्रेन के साथ ही डबलिंग वर्क को हरी झंडी दिखाएंगे। साथ ही एयरपोर्ट के नए भवन का शिलान्यास करेंगे। इसके बाद पीएम मध्य प्रदेश पहुंचेंगे। वे 3 बजकर 30 मिनट पर जबलपुर में होंगे। इस दौरान वे कई योजनाओं का शिलान्यास करेंगे और सभा को संबोधित करेंगे। हालांकि चुनाव आयोग इन राज्यों में चुनाव कराने को लेकर पूरे जोर शोर से जुटा है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में इन राज्यों में चुनावों की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। इससे पहले पीएम मोदी इन राज्यों में कई बड़ी रैलियों और जनसभाओं को संबोधित कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश में लगे हैं। देखना है कि चुनावी सर्वेक्षणों के बाद हो रही नित नई घोषणाओं और रणनीतिक बदलाव के बाद कौन सा दल प्रदेश की जनता का दिल जीतने में कामयाब होता है।
पांच राज्यों के चुनावी नतीजे से तय होगा 2024 में केंद्र में किसकी बनेगी सरकार
- भाजपा को प्रधानमंत्री मोदी का सहारा, कांग्रेस स्थानीय क्षत्रपों के भरोसे
रितेश सिन्हा (वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक)।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्यों में चुनाव प्रस्तावित है, उन पर इन तीन राज्यों में भाजपा और कांग्रेस का पूरा फोकस येन-केन प्रकारेण सरकार बनाने का पूरा दवाब है। भाजपा जहां सत्तारूढ़ दल कांग्रेस की छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकार चल रही है, उसको सत्ता से बेदखल करने की कोशिशों में पूरी ताकत झोक रही है। वहीं कांग्रेस इंडिया गठबंधन में अपना दबदबा कायम रखने के लिए पूरी ताकत लगाए हुए है। इन दोनों प्रदेशों में कांग्रेस अपनी वापसी करने में जुटी है, वहीं मध्य प्रदेश में भाजपा को पछाड़ते हुए सरकार बनाने की फिराक में हैं। इन पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद इंडिया गठबंधन में सीटों के बंटवारे पर गठबंधन में अधिक से अधिक सीटें कांग्रेस अपने पाले में झटकने की कोशिशों में हैं।
मध्य प्रदेश की बात करें तो कांग्रेस यहां भाजपा पर अपनी बढ़त बनाए हुए दिख रही है। क्योंकि पिछले सत्ता परिवर्तन में कांग्रेस अपने गठबंधन के साथ प्रदेश से भाजपा की विदाई कर चुकी थी। मगर स्थानीय नेताओं की हठधर्मिता और एक-दूसरे की काट-छांट की बड़ी वजह से कांग्रेस और कमलनाथ को सत्ता से बाहर जाना पड़ा और शिवराज के नेतृत्व एक बार फिर भाजपा की सरकार बनी जिसमें ज्योतिरादित्य की बड़ी भूमिका सामने आई। भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आए सिंधिया को राज्यसभा में भेजा और केंद्र में मंत्री पद से भी नवाजते हुए केंद्रीय सरकार का हिस्सा बना दिया। सिंधिया ने कांग्रेस में अपने विरोधियों को इस दल-बदल के साथ दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों को राजनीतिक झटका दे दिया था। 2020 में हुए इस बदलाव का बदला लेने के लिए कमलनाथ कड़ा संघर्ष करते हुए भाजपा के खिलाफ माहौल बनाते आ रहे हैं।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस में सत्ता का संघर्ष कमलनाथ और दिग्विजय के बीच दिखाई दे रहा है। कमलनाथ और दिग्विजय दोनों ने प्रभारी रहे जय प्रकाश अग्रवाल को हटवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जयप्रकाश इन दोनों खेमों में बंटी कांग्रेस को एकजुट करने के साथ-साथ प्रदेश के अन्य बड़े नेताओं की भी भागीदारी को सुनिश्चित करना चाहते थे ताकि मध्य प्रदेश में पूर्ण बहुमत से कांग्रेस की सरकार बन सके। ऐसे नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह जो विपक्ष में सदन के नेता भी रहे हैं। उनके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री व आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया, पूर्व सांसद रामेश्वर मिश्रा समेत एक दर्जन नेता जो अपने-अपने जिलों में खासा प्रभाव रखते थे, इनको भी साथ लेने की कवायद में जय प्रकाश को पद से हाथ धोना पड़ा।
जय प्रकाश के प्रयासों को भले ही इन दो नेताओं ने झटका देने का प्रयास किया, मगर मध्य प्रदेश के कांग्रेसियों में जय प्रकाश की लोकप्रियता कम नहीं हुई। उनके लगातार प्रयासों में कांग्रेस को हर विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के मुकाबले बढ़त दिला दी थी। कई चैनलों और चुनावी सर्वे में आज जो बढ़त दिखाई दे रही है, उसमें स्थानीय नेताओं के अलावा जय प्रकाश अग्रवाल का भी बड़ा योगदान है। नवनियुक्त प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला अभी तक अनेक जिलों में जा चुके हैं मगर किसी एक विधानसभा में भी अपना प्रभाव छोड़ने की स्थिति में नहीं रहे। मध्य प्रदेश विधानसभा की कुल 230 सीटों में जिनमें बहुमत का आंकड़ा 116 सीटों का बनता है। चैनलों के द्वारा चलाए गए लगभग सभी चुनावी सर्वेक्षणों में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत से सरकार आती दिख दे रही है।
इन सर्वेक्षणों के नतीजों के अनुसार 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को 118-128 और भाजपा को 102-110 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है। वहीं अन्य को भी 2 सीटें मिलने की संभावना सर्वे बता रहा है। मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 38 सीटों में से भाजपा को 18-22 व कांग्रेस को 16-20 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है। वहीं ग्वालियर-चंबल संभाग में आने वाली 34 सीटों में कांग्रेस को 26-30 और भाजपा को 4-8 सीटों पर अटक रही है। मध्य प्रदेश का मध्य क्षेत्र जिसमें कुल 36 सीटें आती हैं, इनमें भाजपा को 22-24 सीटें कांग्रेस के खाते में 12-14 सीटें मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है। बुंदेलखंड संभाग के अंतर्गत आने वाली 26 सीटों में से भाजपा को 13-15 व कांग्रेस के खाते में 11-13 सीटें मिलती दिख रही है।
मध्य प्रदेश के विंध्य संभाग में भाजपा की बढ़त बनी हुई है। यहां की 30 सीटों में से भाजपा को 19-21 सीटें व कांग्रेस को 8-10 सीटें मिलने की संभावना जतायी जा रही है। मालवा संभाग में महाकौशल की तरह कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। यहां की 66 सीटों में से कांग्रेस को 41-45 सीटें और भाजपा को 20-24 सीटों पर सिमटती दिखाई दे रही है। कांग्रेस की सरकार बनाने में महाकौशल और मालवा पर भरोसा है जहां भाजपा पिछड़ती दिख रही है, मगर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ यहां पूरी ताकत लगाने में जुटा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 महीने के भीतर 8 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को विधानसभा में उतारकर कांग्रेस को तगड़ी चुनौती देने की योजना पर अमल शुरू हो चुका है।
छत्तीसगढ़ में विधानसभा की 90 सीटें हैं जहां 46 सीटें लाने वाली दल की सरकार बनती है। चैनलों और सर्वेक्षण करने वाली एजेंसियों के ताजा सर्वे के अनुसार कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाती दिख रही है। कई सर्वे में 90 विधानसभा सीटों में से 50-70 सीटों पर कांग्रेस और 30-35 सीटों पर भाजपा के सिमटने की बात कही जा रही है। प्रदेश में भाजपा फिर एक बार रमण सिंह के साथ चुनाव मैदान में जाना चाहती है। रमण सिंह लगातार तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, मगर पनामा मामले में नाम आने के बाद उनकी राजनीतिक हैसियत में कमी आई और भूपेश बघेल की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार बनी। छत्तीसगढ़ में दोनों दलों में राजपूत बनाम कुर्मी नेताओं के बीच रस्साकसी है। रमण सिंह राजपूत समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि भूपेश बघेल कुर्मी समुदाय से आते हैं। भाजपा के रमेश बैस जो महाराष्ट्र में बतौर राज्यपाल हैं, वो भी अपना दांव लगाना चाहते हैं। आदिवासी, जनजातीय बाहुल्य प्रदेश में इस समुदाय का साथ कांग्रेस को हमेशा से मिलता रहा है। कुर्मी समुदाय अपने साथ न्याय न होता देख कांग्रेसी बघेल के पीछे लामबंद हैं।
राजस्थान की बात करें तो यहां विधानसभा की 200 सीटें हैं। राज्य में बहुमत से सरकार बनाने का आंकड़ा कम से कम 101 सीटों का बनता है। ताजा सर्वेक्षणों में भाजपा और कांग्रेस के बीच बराबरी की टक्कर अब तक दिखाई दे रही है। दोनों ही दलों में असंतुष्टों की भरमार है। कांग्रेस में सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आमने-सामने हैं, वहीं भाजपा में वसुंधरा राजे बनाम केंद्रीय नेतृत्व के बीच खींचतान जारी है। यहां का चुनावी गणित ऐन नतीजों से पहले कुछ भी कहना सर्वेक्षण के बाहर की बात है। दोनों दलों में टिकट बंटवारे के बाद किसी सटीक नतीजों की तरफ बढ़ा जा सकता है। राजस्थान में जिस तरीके का मुकाबला चुनावी सर्वेक्षण के द्वारा बताया जा रहा है, उससे साफ निकल कर आता है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट, भाजपा केंद्रीय नेतृत्व और वसुंधरा राजे, दोनों ही अपनी बनती सरकारों को पलटने का माद्दा रखते हैं।
जहां कांग्रेस सभी प्रदेशों में राहुल-प्रियंका दोनों ने प्रचार को गति दी हुई है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अकेले भाजपा की ताकत बने हुए हैं। टिकट वितरण के बाद ही इन चुनावी सर्वेक्षणों की अहमियत दिखाई देगी कि सरकार बनते देख भाजपा और कांग्रेस दोनों में बड़ी संख्या में बागियों का उतरना तय है, जिससे हार-जीत का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। राजस्थान में दोनों दलों के आलाकमान की छोटी सी चूक भी जीती हुई बाजी को पलट सकती हैं। आपको बता दें कि इन चुनावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस में खासा घमासान चल रहा है, वहीं चुनाव आयोग भी सभी पहलुओं पर नजर रखते हुए तारीखों का जल्द ही ऐलान करेगा।
छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान और मिजोरम में विधानसभा चुनाव की तारीखों का अभी ऐलान होना बाकी है। चुनावों की प्राथमिक तैयारियां आयोग की तरफ से पूरी हो चुकी है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए घोषणाओं का पिटारा खोल दिया है। 2 अक्टूबर को पीएम मोदी राजस्थान और मध्यप्रदेश का दौरा कर चुके हैं। मोदी ने राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में कई विकास योजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास किया। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में विकास योजनाओं की शुरुआत व कई परियोजनाओं के शिलान्यास के साथ जनसभा भी संबोधित कर चुके हैं। पहले ही 30 सितंबर को भी प्रधानमंत्री छत्तीसगढ़ के दौरे पर पर थे। जहां उन्होंने बिलासपुर में एक जनसभा को संबोधित किया। 3 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में रैली होगी। तेलंगाना का दौरा भी प्रधानमंत्री कर चुके हैं। विकास कार्यों की शुरुआत और शिलान्यास भी किया।
5 अक्तूबर को प्रधानमंत्री फिर राजस्थान और एमपी का दौरा करेंगे। राजस्थान में 11 बजे जोधपुर में कार्यक्रम होगा और 12 बजे रैली होगी। पीएम 5 साल बाद राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर पहुंच रहे हैं। इस दौरान वे नई ट्रेन के साथ ही डबलिंग वर्क को हरी झंडी दिखाएंगे। साथ ही एयरपोर्ट के नए भवन का शिलान्यास करेंगे। इसके बाद पीएम मध्य प्रदेश पहुंचेंगे। वे 3 बजकर 30 मिनट पर जबलपुर में होंगे। इस दौरान वे कई योजनाओं का शिलान्यास करेंगे और सभा को संबोधित करेंगे। हालांकि चुनाव आयोग इन राज्यों में चुनाव कराने को लेकर पूरे जोर शोर से जुटा है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में इन राज्यों में चुनावों की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। इससे पहले पीएम मोदी इन राज्यों में कई बड़ी रैलियों और जनसभाओं को संबोधित कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश में लगे हैं। देखना है कि चुनावी सर्वेक्षणों के बाद हो रही नित नई घोषणाओं और रणनीतिक बदलाव के बाद कौन सा दल प्रदेश की जनता का दिल जीतने में कामयाब होता है।


















