नूरपुर में 12 फीट ऊँचा ताज़िया निकालने की शर्त पर विवाद, प्रशासन पर नई परंपरा लागू करने का आरोप

रिपोटर विकास सिंह
नूरपुर में 12 फीट ऊँचा ताज़िया निकालने की शर्त पर विवाद, प्रशासन पर नई परंपरा लागू करने का आरोप
नूरपुर।नूरपुर शहर में वर्षों से चली आ रही मुहर्रम की ऐतिहासिक परंपरा को लेकर इस वर्ष एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन द्वारा ताज़िए की ऊँचाई 12 फीट तक सीमित करने की मौखिक शर्त ने ताज़िया कमेटियों और शहरवासियों को असमंजस में डाल दिया है। लोगों का कहना है कि यह एक नई परंपरा थोपने जैसा है, जिसके कोई आधिकारिक आदेश नहीं हैं।
नूरपुर शहर में दो प्रमुख ताज़िए—एक अंसारियान बिरादरी का और दूसरा मनिहारान-क़ुरैशी बिरादरी का—सदियों से निकलते आ रहे हैं। इनकी ऊँचाई परंपरागत रूप से 80 से 100 फीट तक रही है। यह परंपरा आज़ादी से पहले की है और हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल मानी जाती रही है।
पिछले वर्षों में नहीं रही कोई रोक
पिछले वर्ष भी मुहर्रम के अवसर पर डीआईजी मुरादाबाद, सीओ चाँदपुर और एसपी बिजनौर ने ताज़िया मार्गों का निरीक्षण किया था। थाना परिसर में दोनों कमेटियों व शहर के सम्मानित नागरिकों की उपस्थिति में एक बैठक आयोजित की गई थी। उस समय प्रशासन ने किसी प्रकार की ऊँचाई की पाबंदी नहीं लगाई थी और दोनों ताज़िए लगभग 90 फीट ऊँचे बनाए गए थे।
इस वर्ष अचानक 12 फीट की सीमा क्यों?
इस वर्ष भी नूरपुर प्रशासन द्वारा कहा गया है, जिसमें कहा गया है कि ताज़िए की ऊँचाई 12 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए। जब कमेटियों ने इस संबंध में प्रशासन से लिखित आदेश या शासन की गाइडलाइन मांगी, तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया और न ही कोई आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत किया गया।कमेटियों का कहना है कि जब शासन स्तर से इस प्रकार का कोई आदेश नहीं आया है, तो स्थानीय पुलिस इस नई परंपरा को क्यों थोपने पर आमादा है? लोगों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताते हुए गहरी नाराजगी जताई है।
शहर में असमंजस और आक्रोश का माहौल
प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं आने के कारण ताज़िया कमेटियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं, शहर के संभ्रांत नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन से मांग की है कि वे पारंपरिक आयोजन में अवरोध न डालें और पूर्व वर्षों की भांति समन्वय के साथ कार्यक्रम संपन्न करवाएं।


















