तैमूर और बाबर के खून से मुहम्मद शाह रंगीला जैसे राजकुमार कैसे पैदा हो गये
दिल्ली-आयान शादाब

आख़िर खुल गया सारे ज़माने पर
हमीयत नाम था जिसका, गई तैमूर के घर से
जब ग़ुलाम क़ादिर रोहिल्ला ने मुगल बादशाह मुहम्मद शाह रंगीला के वक़्त दिल्ली पर हमला किया,दिल्ली जीत कर लाल किले पर i कब्ज़ा करने के, बाद उसने महल मे हुक्म दिया कि, जितनी भी रानियां और राजकुमारियां हैं, सभी तैयार होकर आ जांए मै सबका नाच देखना चाहता हूं।
हुक्म की तामिल हुई, दरबार मे सभी सजधज कर आ गयीं, उधर ग़ुलाम क़ादिर रोहिल्ला अपनी तलवार और खंजर बगल मे रखकर सो गया, और मुग़ल शहज़ादियाँ नाचती रहीं।
थोड़ी देर बाद उसने आंखे खोली और सबसे बोला तुम लोग जाओ मैं तो सिर्फ ये देखना चाहता था की #तैमूर और #बाबर के खून से मुहम्मद शाह रंगीला जैसे राजकुमार कैसे पैदा हो गये, लेकिन अब समझ आ गया कि जब उनके घरों मे तुम जैसी नाचने गाने वाली आ गयी हैं तो बाबर और तैमूर नही रंगीला ही पैदा होंगे।
मेरा ख्याल था कि, तैमुर की बेटियोँ में कुछ गैरत और हमीयत बाकी रह गई होगी, और वह मुझे सोता समझ कर मेरे ही ख़ंजर से क़त्ल करने की कोशिश करेंगी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, अब मुग़ल शहंशाहियत को मिटने से कोई नहीं बचा सकता।
बाबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों के दरबार मे पढ़े लिखे विद्वान रहते थे, हुकूमत को कैसे बढ़ाना है उस पर बातें होती थी लेकिन औरंगजेब के बाद मुगल दरबार तवाएफों के मुजरों के लिए पहचाने जाने लगे, दरबार मे मुजरों की महफिलें सजने लगीं, और मुगलों का नामो निशान मिट गया।
आज वही हाल हमारे समाज का हो गया है, उलेमाओं से ज्यादा, #कव्वालों और #शायरों को इज्जत दी जाती है। और फिर हम मसीहा का इंतजार कर रहे हैं।
नाचने गाने वाले हमारे रोल माँडल हैं और सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी जैसे के पैदा होने की उम्मीद रखते हैं।






