करंट से प्रियांशु की मौत पर मानवाधिकार आयोग सख्त – डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत पर विद्युत निगम के एमडी से रिपोर्ट तलब, 28 सितंबर तक देनी होगी रिपोर्ट

करंट से प्रियांशु की मौत पर मानवाधिकार आयोग सख्त – डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत पर विद्युत निगम के एमडी से रिपोर्ट तलब, 28 सितंबर तक देनी होगी रिपोर्ट
किरतपुर/बिजनौर। धार्मिक कलश यात्रा के दौरान कथित रूप से विद्युत तार के संपर्क में आने से युवक प्रियांशु राजपूत की मौत का मामला अब उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में पहुंच गया है। मामले को लेकर World Accreditation of Human Rights (WAOHR-India) के राष्ट्रीय महासचिव एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. तारिक़ ज़की द्वारा दाखिल शिकायत पर आयोग ने गंभीरता दिखाते हुए दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, आगरा के प्रबंध निदेशक से जांच कर रिपोर्ट तलब की है।
उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक शिकायत को केस/फाइल संख्या 17605/24/17/2026 के तहत पंजीकृत किया गया है। शिकायत 11 अगस्त 2026 को दर्ज हुई और आयोग ने 13 अगस्त को संबंधित विद्युत निगम के उच्च अधिकारी से रिपोर्ट मांगी।

डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत में कहा गया है कि किरतपुर में धार्मिक अवसर पर निकाली जा रही कलश यात्रा के दौरान जैन चौराहे के निकट सड़क पर झूल रहे विद्युत तार/केबल के संपर्क में आने से प्रियांशु करंट की चपेट में आया और उसकी मौत हो गई।
शिकायत में यह भी आरोप उठाया गया है कि संबंधित क्षेत्र में पूर्व में विद्युत दुर्घटना की जानकारी होने के बावजूद सार्वजनिक मार्ग एवं धार्मिक आयोजन के दौरान विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को पर्याप्त रूप से सुनिश्चित नहीं किया गया। यदि जांच में यह तथ्य पुष्ट होता है, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही का प्रश्न गंभीर रूप से उठ सकता है
मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. तारिक़ ज़की ने आयोग के समक्ष मामले को केवल एक आकस्मिक दुर्घटना मानकर समाप्त किए जाने के बजाय जीवन के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामले के रूप में उठाया है।
शिकायत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, विद्युत तार/केबल, पोल, ऊंचाई, कनेक्शन एवं सुरक्षा मानकों की तकनीकी जांच तथा संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका निर्धारित किए जाने की मांग की गई है।
इसके साथ ही मृतक के परिजनों को ₹10 लाख प्रतिकर दिए जाने की संस्तुति तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए धार्मिक स्थलों, बाजारों, शोभायात्रा मार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।
आयोग की 13 अगस्त 2026 की कार्रवाई के अनुसार, शिकायत में लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, आगरा के प्रबंध निदेशक को मामले की जांच कर आवश्यक रिपोर्ट आयोग को भेजने का निर्देश दिया गया है।
रिपोर्ट 28 सितंबर 2026 या उससे पहले आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जानी है।
मामले में यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि आयोग की वर्तमान कार्रवाई का अर्थ किसी अधिकारी अथवा विभाग को दोषी ठहराना नहीं है। आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तथ्यात्मक जांच और रिपोर्ट मांगी है। किसी अधिकारी की लापरवाही अथवा जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच रिपोर्ट तथा आयोग की आगे की कार्रवाई के बाद ही होगा।
मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब मुख्य सवाल यह है कि विद्युत निगम अपनी रिपोर्ट में घटना के समय विद्युत तार/केबल की वास्तविक स्थिति, सुरक्षा मानकों के अनुपालन, पूर्व की घटनाओं तथा संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी के संबंध में क्या तथ्य प्रस्तुत करता है।
प्रियांशु की मौत ने सार्वजनिक एवं धार्मिक आयोजनों के मार्गों पर विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत पर आयोग द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने से मामले में जवाबदेही की जांच का रास्ता खुला है।
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