गहरे समुद्र की संपदा और कैंसर शोध में नई संभावनाओं पर काम कर रहा इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज

गहरे समुद्र से निकलेगी नई दवाओं की राह,इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज में अत्याधुनिक शोध ||
समुद्री जैव विविधता और कैंसर उपचार पर वैज्ञानिकों का बड़ा कदम,एआइ से मिल रही नई दिशा ||
दीप ओशन मिशन के तहत भारत की बड़ी पहल,समुद्री संसाधनों से खुलेंगे विकास के द्वार ||
सूक्ष्म जीवों से सुपर एंजाइम तक भुवनेश्वर के वैज्ञानिक बना रहे भविष्य की तकनीक ||
‘साइंस फॉर सोसाइटी’ की दिशा में अग्रसर शोध,कैंसर और पर्यावरण संरक्षण पर फोकस ||
समुद्र की गहराइयों में छिपा खजाना,भारत खोज रहा नई दवाओं और तकनीक का भविष्य ||
कैंसर उपचार से लेकर पर्यावरण तक,भुवनेश्वर के वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी की ओर कदम ||
दीप ओशन मिशन से बदलेगा भविष्य,समुद्री संसाधनों पर भारत की तेज होती पकड़ ||
गहरे समुद्र के सूक्ष्म जीव खोलेंगे विज्ञान के नए राज,शोध में जुटे भारतीय वैज्ञानिक ||
एआइ और डीएनए तकनीक से कैंसर पर वार,इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज में बड़ा शोध ||
समुद्री जैव विविधता पर भारत का फोकस,नई खोजों से खुलेगा विकास का रास्ता ||
भविष्य की दवाएं समुद्र से वैज्ञानिकों के शोध से बढ़ी उम्मीदें ||
चीन-अमेरिका को टक्कर देने की तैयारी,समुद्री शोध में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत ||
भुवनेश्वर/वाराणसी :- इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज में वैज्ञानिक समुद्री जैव विविधता,कैंसर उपचार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई अत्याधुनिक शोध कार्यों पर काम कर रहे हैं | संस्थान में वैज्ञानिकों द्वारा गहरे समुद्र में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों और एंजाइमों पर शोध किया जा रहा है जिनसे भविष्य में नई दवाओं और औद्योगिक उपयोग की संभावनाएं सामने आ रही हैं | संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी का गहरा समुद्री क्षेत्र अभी भी सबसे कम खोजे गए क्षेत्रों में से एक है इन क्षेत्रों में मौजूद जैविक संसाधनों की पहचान और उनके डीएनए की जांच के माध्यम से कई नई वैज्ञानिक जानकारियां प्राप्त की जा रही हैं | वैज्ञानिकों ने बताया कि भारत सरकार के दीप ऑसियन मिशन के तहत गहरे समुद्र में छिपी जैविक और खनिज संपदा की खोज और उसके वैज्ञानिक उपयोग पर भी कार्य किया जा रहा है | इस मिशन के माध्यम से समुद्री जीवों से प्राप्त विशेष एंजाइमों का अध्ययन किया जा रहा है जिनका उपयोग पर्यावरण संरक्षण,औद्योगिक प्रक्रियाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र में किया जा सकता है |
संस्थान के वैज्ञानिक डॉ.गुलाम ने बताया कि समुद्र में पाए जाने वाले कई सूक्ष्म जीव ऐसे एंजाइम उत्पन्न करते हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी सक्रिय रहते हैं | इन एंजाइमों का उपयोग पर्यावरण संरक्षण,जैव प्रौद्योगिकी और औषधि निर्माण में किया जा सकता है उन्होंने बताया कि संस्थान में कैंसर से जुड़े शोध कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है | आधुनिक तकनीकों और डीएनए विश्लेषण के माध्यम से कैंसर की प्रारंभिक पहचान और बेहतर उपचार के लिए नई संभावनाओं की तलाश की जा रही है |
वैज्ञानिकों ने बताया कि इन शोध कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है जिससे बड़े पैमाने पर जैविक डेटा के विश्लेषण और नई खोजों में सहायता मिल रही है | इस क्षेत्र में चीन और अमेरिका ने पहले से व्यापक कार्य किया है और अब भारत भी समुद्री संसाधनों और जैव विविधता के अध्ययन में तेजी से आगे बढ़ रहा है | विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास विस्तृत समुद्री क्षेत्र होने के कारण समुद्री जैव संसाधनों की खोज और उनका उपयोग देश के वैज्ञानिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है | संस्थान में चल रहे शोध कार्य “साइंस फॉर सोसाइटी” के सिद्धांत पर आधारित हैं जिनका उद्देश्य समाज और समुदाय पर सकारात्मक प्रभाव डालना है ||


















