अपनी मर्जी की बात करने लगे, तो केजरीवाल को लगा बुरा…’ राघव चड्ढा को लेकर ओपी राजभर ने आप पर कसा तंज

Raghav Chadha News: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने आम आदमी पार्टी (AAP) के अंदरूनी मामले पर तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब अरविंद केजरीवाल ने राघव चड्ढा पर पूरा विश्वास किया। उन्हें राज्यसभा भेजा और सदन में उपनेता (डिप्टी लीडर) का पद भी दिया। राजभर ने पूछा कि जब किसी को उपनेता बनाया जाता है, तो क्या वह अपनी बुद्धि और विवेक से काम करेगा या सिर्फ पार्टी की मर्जी से?, जब राघव चड्ढा सदन में अपनी मर्जी से बात रखने लगे तो पार्टी को यह बुरा लगने लगा। राजभर ने कहा कि यह आम आदमी पार्टी के अंदर की असली तस्वीर दिखाता है।
AAP का बड़ा फैसला
आम आदमी पार्टी ने एक अचानक और चौंकाने वाला फैसला लिया है। पार्टी ने अपने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया। उनकी जगह पंजाब से राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र लिखकर इस बदलाव की जानकारी दी। साथ ही, राघव चड्ढा को सदन में पार्टी की ओर से बोलने का समय न देने की भी मांग की गई। यह फैसला पार्टी के अंदरूनी कलह को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया
पद से हटाए जाने के कुछ घंटों बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश पोस्ट किया। वीडियो में उन्होंने अपने संसद में दिए गए भाषणों के अंश दिखाए। उन्होंने लिखा कि खामोश करवाया गया हूँ, हारा नहीं हूँ। ‘आम आदमी’ को मेरा संदेश।’ इस संदेश से साफ है कि राघव चड्ढा खुद को चुप कराए जाने का शिकार मान रहे हैं, लेकिन हार नहीं मानी है। उन्होंने आम लोगों से सीधा संवाद करने की कोशिश की।
क्या है पूरा मामला?
राघव चड्ढा को 2023 में डिप्टी लीडर बनाया गया था। वे पार्टी के चेहरे के रूप में सदन में सक्रिय रहते थे। हाल के दिनों में पार्टी की कुछ बड़ी घटनाओं पर उनकी चुप्पी और पार्टी लाइन से अलग रुख को लेकर अंदरूनी नाराजगी बढ़ गई थी। पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि चड्ढा कुछ मुद्दों पर BJP के खिलाफ सख्ती से नहीं बोल रहे थे। वहीं राघव चड्ढा के समर्थक इसे पार्टी के अंदर स्वतंत्र सोच को दबाने की कोशिश बता रहे हैं। अशोक मित्तल, जो लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं, अब नई डिप्टी लीडर बन गए हैं। पार्टी ने इसे सामान्य बदलाव बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा जोरों पर है।
अंदरूनी हालात पर उठे सवाल
यह घटना आम आदमी पार्टी के अंदरूनी हालात पर सवाल उठा रही है। राघव चड्ढा अभी भी राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन पार्टी की तरफ से बोलने का अधिकार अब सीमित हो गया है। देखना होगा कि आगे राघव चड्ढा क्या कदम उठाते हैं। क्या वे पार्टी में बने रहेंगे या कोई नया रास्ता चुनेंगे?।




























