वाराणसी/उत्तरप्रदेश

समुद्र के विविध पहलुओं पर मंथन के लिए बीएचयू में राष्ट्रीय कार्यशाला का उदघाटन

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वाराणसी 18 फरवरी 2026: “समुद्र के विविध पहलुओं पर मंथन के लिए” काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विज्ञान संस्थान के भूविज्ञान विभाग स्थित आई.सी.पांडे सभागार में किया गया। यह कार्यशाला इनसा इंटरनेशनल साइंस काउंसिल कमेटी फॉर SCOR – साइंटिफिक कमेटी ऑन ओशेनिक रिसर्च के तत्वावधान में आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं शोधकर्ता सहभागिता कर रहे है।
कुलपति एवं मुख्य अतिथि प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपने मुख्य वक्तव्य में अनुसंधान में उत्कृष्टता बनाए रखने और आत्मसंतोष से बचने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पूर्ववर्ती विद्वानों द्वारा स्थापित मजबूत शैक्षणिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा शोधकर्ताओं को जिज्ञासा, समर्पण और निरंतर सीखने की भावना के साथ इसे आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने विकासशील राष्ट्र होने के बावजूद अंतरिक्ष, महासागर एवं उप-परमाण्विक भौतिकी जैसे क्षेत्रों में मूलभूत वैज्ञानिक अनुसंधान को प्राथमिकता दी है, क्योंकि राष्ट्रीय प्रगति दीर्घकालिक दृष्टिकोण से ही संभव है।
उन्होंने शोधकर्ताओं से विद्यालयी शिक्षा से जुड़कर भावी पीढ़ी को प्रेरित करने का आह्वान किया तथा विज्ञान और अभियांत्रिकी के बीच माने जाने वाले विभाजन को निराधार बताते हुए उन्हें एक सतत क्रम का हिस्सा बताया, जहाँ पारस्परिक सहयोग नवाचार और अनुसंधान की गुणवत्ता को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ वैज्ञानिक सिद्धांत के साथ-साथ प्रायोगिक कार्य, अभियांत्रिकी और उपकरण विकास में भी समान रूप से दक्ष रहे हैं।
प्रो. मनमोहन सरीन, इनसा-सीनियर साइंटिस्ट, पीआरएल, अहमदाबाद ने वैश्विक समुद्र विज्ञान अनुसंधान में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया तथा युवा शोधकर्ताओं के बीच सहयोग एवं क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कार्यशाला के लिए चयनित आठ प्रमुख विषयों का उल्लेख करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि प्रतिभागी इन चर्चाओं से लाभान्वित होकर अपने-अपने संस्थानों में ज्ञान का विस्तार करेंगे।
प्रो. अरुण देव सिंह, भूविज्ञान विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला अध्यक्ष ने स्वागत भाषण में समुद्री अनुसंधान के अंतःविषयक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि अतीत की जलवायु परिवर्तनशीलता को समझना वर्तमान चुनौतियों जैसे समुद्री ऊष्मीकरण, डीऑक्सीजनेशन और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यशाला के अंतर्गत मुख्य सत्र व्याख्यान एवं तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें मरीन प्रॉक्सी, आधुनिक समुद्री अवलोकन, समुद्र-स्तर वृद्धि, महासागर-जलवायु मॉडल, जैव-रसायन एवं कार्बन चक्र, एआई/एमएल एवं ओपन डेटा टूल्स, प्रदूषण एवं समुद्री स्वास्थ्य तथा महासागरीय हाइपॉक्सिया जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह में विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजेश कुमार श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष रूप से गौरवान्वित किया। कार्यक्रम का संचालन सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ तथा अंत में आयोजन सचिव डॉ. कोमल वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यशाला के संयोजक डॉ. दिनेश कुमार नाइक ने आयोजन के सफल समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह कार्यशाला जलवायु विज्ञान, नवाचार और भविष्य के समुद्री अनुसंधान को एक साझा मंच पर लाते हुए विश्वविद्यालय की अनुसंधान-उन्मुख एवं वैश्विक दृष्टि को पुनः रेखांकित करती है।

Sallauddin Ali

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