पीएम के संसदीय इलाके में पीजी गेस्ट हाउस के नाम पर हो रहा यह खेल। जानिए कौन है वह सरगना

पीजी गेस्ट हाउस के नाम पर 15 से 25 हजार की अवैध वसूली
विभागीय लिपिक पर वसूली का आरोप
वाराणसी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पीजी गेस्ट हाउस के पंजीकरण और संचालन के नाम पर 15 से 25 हजार रुपये तक की अवैध वसूली का मामला सामने आया है। विभाग में तैनात एक लिपिक को इस पूरे खेल का सरगना बताया जा रहा है, जिसकी चर्चा अब दफ्तरों से निकलकर सड़कों तक पहुंच गई है।
अवैध गेस्ट हाउस भी वसूली के दायरे में
सूत्रों की मानें तो यह उगाही केवल नियमों के तहत चल रहे पीजी तक सीमित नहीं है। अवैध रूप से संचालित गेस्ट हाउसों से भी संरक्षण के बदले मोटी रकम वसूली जा रही है। बताया जाता है कि संबंधित लिपिक कार्रवाई का डर दिखाकर या फिर कार्रवाई से “बचाने” का भरोसा देकर पैसे ऐंठता है।
बड़े अधिकारियों का नाम लेकर दबाव
सबसे गंभीर आरोप यह है कि वसूली के दौरान विभाग के बड़े अधिकारियों का नाम लिया जाता है। इससे गेस्ट हाउस संचालक भयभीत रहते हैं और शिकायत करने से बचते हैं। कई संचालकों का कहना है कि जो पैसा नहीं देता, उसकी फाइल जानबूझकर लटकाई जाती है, कभी निरीक्षण तो कभी नोटिस की धमकी दी जाती है।
पर्यटन नगरी में भ्रष्टाचार का दाग
काशी देश-विदेश के पर्यटकों का प्रमुख केंद्र है, लेकिन ऐसे आरोप पर्यटन विभाग की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। सवाल यह है कि जब देश के सबसे वीआईपी संसदीय क्षेत्र में भ्रष्टाचार खुलेआम फल-फूल रहा है, तो जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे क्यों बैठे हैं।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबा दिया जाएगा।






