डिजिटल तकनीक से बदलेगा भारत का डेयरी क्षेत्र,35 करोड़ से अधिक पशुओं को मिली ‘पशु आधार’ पहचान

वाराणसी :-भारत जो विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और वैश्विक दुग्ध उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है अब अपने डेयरी क्षेत्र को डिजिटल तकनीक के माध्यम से नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है | राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के नेतृत्व में देश का डेयरी इकोसिस्टम पारदर्शिता,दक्षता और किसान-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है | इस डिजिटल परिवर्तन की सबसे बड़ी उपलब्धि राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (एनडीएलएम) के अंतर्गत सामने आई है। मिशन के तहत अब तक 35.68 करोड़ से अधिक पशुओं को 12 अंकों वाली विशिष्ट डिजिटल पहचान ‘पशु आधार’ प्रदान की जा चुकी है | यह पहचान पशुओं के स्वास्थ्य,टीकाकरण, प्रजनन और उपचार से जुड़ी सभी जानकारियों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराती है जिससे पशुधन प्रबंधन पूरी तरह डेटा-आधारित और ट्रैक करने योग्य बन गया है अब तक इस प्रणाली में 84 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज किए जा चुके हैं |
पशुपालकों को सशक्त बनाने के लिए एनडीएलएम के अंतर्गत ‘1962 ऐप’ और टोल-फ्री नंबर 1962 की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है जिसके माध्यम से पशुपालक घर बैठे मोबाइल वेटरनरी यूनिट की सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं और सरकारी योजनाओं से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी हासिल कर सकते हैं |
डेयरी सहकारिता के मूल ढांचे को मजबूत करने के लिए एनडीडीबी द्वारा विकसित ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम (एएमसीएस) ने दूध संग्रह प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव किया है। यह प्रणाली दूध की मात्रा,गुणवत्ता और फैट की सटीक डिजिटल रिकॉर्डिंग करती है तथा इसके आधार पर भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर होता है | वर्तमान में देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 26,000 से अधिक डेयरी सहकारी समितियों में यह प्रणाली लागू है जिससे 54 दुग्ध संघों के 17.3 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादक किसान लाभान्वित हो रहे हैं |
डेयरी उद्योग के संपूर्ण प्रबंधन के लिए एनडीडीबी डेयरी ईआरपी (एनडीईआरपी) को लागू किया गया है यह वेब-आधारित प्रणाली खरीद,बिक्री,लेखा,उत्पादन,मानव संसाधन और लॉजिस्टिक्स जैसे सभी प्रमुख कार्यों को एकीकृत करती है | एएमसीएस के साथ इसके एकीकरण से गाय से लेकर उपभोक्ता तक पूरी वैल्यू चेन डिजिटल हो गई है |
इसके अलावा,सीमेन स्टेशन मैनेजमेंट सिस्टम (एसएसएमएस) और आईएनएपीएच जैसे प्लेटफॉर्म पशु प्रजनन,पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, मानकीकरण और पारदर्शिता सुनिश्चित कर रहे हैं | देश के 38 श्रेणीबद्ध सीमेन स्टेशन इस डिजिटल प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं जिससे कृत्रिम गर्भाधान नेटवर्क को मजबूती मिली है |
डेयरी क्षेत्र में डेटा-आधारित निर्णयों को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेट आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS) भी विकसित की गई है | वर्तमान में देश के लगभग 198 दुग्ध संघ,29 मार्केटिंग डेयरियां और 15 फेडरेशन इस प्रणाली से जुड़े हैं जिससे राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त और विश्वसनीय डेयरी डेटाबेस तैयार हो रहा है | दूध परिवहन को अधिक किफायती और कुशल बनाने के लिए जीआईएस आधारित मिल्क रूट ऑप्टिमाइजेशन तकनीक अपनाई गई है इससे परिवहन लागत और समय में उल्लेखनीय कमी आई है वाराणसी,झारखंड, इंदौर और पश्चिमी असम जैसे क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं |
विशेषज्ञों के अनुसार,सहकारिता की ताकत और डिजिटल नवाचार के इस संगम से भारत का डेयरी क्षेत्र न केवल अधिक पारदर्शी और कुशल बन रहा है बल्कि लाखों छोटे और सीमांत किसानों को भी आधुनिक तकनीक से सीधे जोड़ रहा है | यह पहल भारत को सुरक्षित,सतत और तकनीक-आधारित दुग्ध उत्पादन में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर कर रही है ||





