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चैयरमैन मो खुर्शीद मंसूरी बनाम विधायक तसलीम अहमद बनाम जनता : छवि पर हमला या सियासत की जंग…?

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चैयरमैन मो खुर्शीद मंसूरी बनाम विधायक तसलीम अहमद बनाम जनता : छवि पर हमला या सियासत की जंग…?

नजीबाबाद
नगर पंचायत साहनपुर के अध्यक्ष एवं आज़ाद समाज पार्टी के मंडल प्रभारी मो खुर्शीद मंसूरी और विधायक तसलीम अहमद के बीच की सियासी खींचतान अब सोशल मीडिया के कोर्टरूम और अखबारों की हेडलाइन में खुली जंग बन चुकी है।

खुर्शीद मंसूरी ने पुलिस को तहरीर थमाते हुए आरोप लगाया कि “असामाजिक तत्व” फेसबुक पर फर्ज़ी पोस्ट डालकर उनकी छवि की ऐसी धुलाई कर रहे हैं, मानो वॉशिंग मशीन का एड शूट हो रहा हो। एक फेसबुकिया “योद्धा” का नाम और नंबर तक तहरीर में चिपकाया गया है, जिसने पोस्ट डालकर दावा किया कि विधायक तसलीम अहमद विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर खुर्शीद मंजूरी को बदनाम करने की परियोजना चला रहे हैं।

खुर्शीद मंसूरी का कहना है कि यह सब उनकी सियासी साख को मटियामेट करने और 2027 के चुनावी अखाड़े में उन्हें “साइडलाइन” करने की साजिश है। उन्होंने पुलिस से गुहार लगाई है कि दोषियों पर कार्रवाई हो और उन्हें अपनी जान-माल की सुरक्षा दी जाए, क्योंकि उन्हें अब राजनीति कम और खतरा ज़्यादा महसूस हो रहा है।

इधर जनता का हाल यह है कि लोग इस पूरे प्रकरण को “मो खुर्शीद बनाम विधायक तसलीम अहमद बनाम जनता” की तिकड़ी जंग करार दे रहे हैं।

जनता कहती है, “साहब लोग लड़ें चाहे सोशल मीडिया पर या विधानसभा में, चुटकी तो हमारी जेब और वोट पर ही ली जाएगी।”

कुछ ने तो इसे “फेसबुकिया कुश्ती” कहा है, जहाँ पहलवान भी नकली हैं और तमाशा भी।

अब देखने वाली बात यह है कि पुलिस की जाँच इस धुंधले खेल में कौन सा चेहरा साफ करती है – असली गुनहगार का, या फिर जनता को ही बता देती है कि “आपका काम तो बस ताली बजाना है।”

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