गोद लिए गए 50 बच्चों को पढ़ाया गया धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान का पाठ

काशीपुर / उत्तराखंड (नसरीन खान निशा ),,,,गोद लिए गए 50 बच्चों को आध्यात्मिक व धार्मिक ज्ञान से परिचित कराने के उद्देश्य से सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रीय छात्रावास, काशीपुर में एक भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन संपन्न हुआ। डी-बाली ग्रुप की डायरेक्टर एवं समाजसेविका उर्वशी दत्त बाली, छात्रावास वार्डन ज्योति राणा तथा समस्त स्टाफ के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे परिसर को खुशियों, संगीत और मुस्कानों से सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर गुरुकुल फाउंडेशन से नीरज कपूर अपने बच्चों एवं लगभग 30 स्टाफ सदस्यों के साथ छात्रावास पहुंचे और बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए उपहार भेंट किए। यह बच्चों के लिए एक सुखद सरप्राइज रहा, जिससे छात्रावास का वातावरण हंसी-खुशी और उल्लास से भर गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत सनातन धर्म के गौरवशाली मूल्यों को समर्पित “तुलसी पूजन” का भव्य आयोजन किया गया। बच्चों को बताया गया कि हिंदू धर्म में ईश्वर को सर्वव्यापक माना गया है, जो केवल मंदिरों या मूर्तियों में ही नहीं बल्कि सृष्टि के कण-कण में विद्यमान हैं। इसी कारण पौधों, पशु-पक्षियों, जल और प्रकृति में ईश्वर का वास माना जाता है।
बच्चों को यह भी समझाया गया कि पंचमहाभूत अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश—से बनी इस सृष्टि में हर तत्व पूजनीय है। हिंदू धर्म करुणा, अहिंसा और प्रेम का संदेश देता है। साथ ही यह भी सिखाया गया कि यदि कोई हमारे धर्म की आलोचना करे तो हिंसा या कटुता का मार्ग नहीं अपनाना चाहिए, बल्कि शांति, संयम और प्रेम को बनाए रखना ही हमारे संस्कार हैं।
यह आयोजन हिन्दू वाहिनी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव आनंद तिवारी एवं प्रदेश अध्यक्ष रुचिन शर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुआ। संस्था द्वारा भोजन एवं प्रसाद की सुंदर व्यवस्था की गई।
तुलसी माता की संपूर्ण साज-सज्जा प्रदेश अध्यक्ष (महिला प्रकोष्ठ) श्रीमती पूजा अरोड़ा के नेतृत्व में संगठन की महिलाओं, स्कूल के बच्चों तथा मिनी इवेंट्स के सहयोग से की गई।
छात्रावास में स्थित मंदिर की साज-सज्जा आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षक राज राणा द्वारा की गई, जबकि मंदिर हेतु सहयोग श्रीमती सुधा जिंदल ने प्रदान किया। इसी दौरान सोनी सेठ ने बच्चों को तुलसी पूजन अवसर पर योग कार्पेट एवं अन्य उपहार भी भेंट किए।
बच्चों को छह दिनों तक आरती एवं प्रार्थना का अभ्यास कराया गया और उन्हें बताया गया कि तुलसी जी में लक्ष्मी का वास माना जाता है तथा घर में सुख-समृद्धि के लिए तुलसी का विशेष महत्व है।
इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों में संस्कार, अनुशासन और धर्म के प्रति श्रद्धा का भाव विकसित करना रहा। बच्चों को यह संदेश दिया गया कि “जहाँ जीवन है, वहीं ईश्वर हैं”—यही सनातन धर्म की सच्ची शिक्षा है।





