नमामि गंगे परियोजना अंतर्गत जैविक कृषि कार्यक्रम की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा
बिजनौर – अपर मुख्य सचिव कृषि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जनपद में संचालित नमामि गंगे परियोजना अंतर्गत जैविक कृषि कार्यक्रम की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की गई, जिससे जिलाधिकारी, उमेश मिश्रा द्वारा जैविक कृषि कार्यक्रम का प्रस्तुतीकरण किया गया तथा जनपद में संचालित कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए अवगत कराया गया कि गंगा के किनारे स्थित 46 ग्राम पंचायतों के 1474 किसानों के 58 समूहों द्वारा 1234 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जैविक पद्धति से बिना रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक के प्रयोग के फलोत्पादन का कार्य किया जा रहा है।
चयनित किसानों के द्वारा प्रथम खरीफ में कुल 1232 कुंटल बासमती/सरबती चावल, 2085 कुंटल सामान्य चावल, 125 कुंटल उर्द, 585 कुंटल सब्जियां तथा 20831 कुंटल गुड़ का उत्पादन किया गया और प्रथम रवि में 5707 कुंटल गेहूं, 545 कुंटल सरसों, 160 क्विंटल चना, 98 कुंटल मसूर तथा 1206 कुंटल सब्जियां उत्पादित हुई. प्रथम खरीफ एवं रबी में उत्पादित जैविक उत्पादों की बिक्री से किसानों द्वारा लगभग 9700000 रुपए की बिक्री की गई. यह भी अवगत कराया गया कि जैविक कृषि से आगामी 3 वर्षों तक कृषि उत्पादन मैं गिरावट आती है परंतु परियोजना अंतर्गत प्रथम वर्ष में रुपए 12000 वित्तीय वर्ष में रुपए 10,000 एवं तृतीय वर्ष में रुपए 9000 की आर्थिक सहायता प्राप्त होने से किसानों द्वारा जैविक खेती में रूचि ली जा रही है ।
साथ ही चयनित किसानों का सघन प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाने से उनके द्वारा मृदा परीक्षण उपरांत हरी खाद उत्पादन एवं जिप्सम के प्रयोग करने के उपरांत ऑन फॉर्म कृषि निवेश जैसे वर्मी कंपोस्ट, तरल जैविक कीटनाशक जीवामृत, घनामृत, बायो कंपोजर के साथ-साथ उपलब्ध कराए गए प्रोम, जैव उर्वरक, बायो pesticides के प्रयोग करने से गुणवत्ता युक्त फसल उत्पादन प्राप्त हुआ और कृषि लागत में भी रासायनिक खेती की तुलना में लगभग 40% की कमी आई, साथ ही उत्पादित उत्पाद की बिक्री 10 से 25% अधिक मूल्य पर होने से शुद्ध आर्थिक लाभ भी अधिक प्राप्त हुआ है। किसानों द्वारा उत्पादित जैविक उत्पाद के विपणन की मुख्य समस्या को दूर करने हेतु विकास भवन परिसर में स्थाई जैविक उत्पाद बिक्री केंद्र की स्थापना के साथ-साथ जनपद तहसील और विकासखंड मुख्यालयों पर कैनोपी लगाकर उत्पादों की बिक्री कराई जा रही है।
जिससे किसानों के जैविक उत्पादों की न केवल सुगमता से बिक्री हो रही है बल्कि उन्हें लाभकारी मूल्य भी प्राप्त हो रहा है। जैविक उत्पादों हेतु सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य जनपद के प्रमुख संस्थानों यथा पुलिस लाइन, आवासीय कस्तूरबा गांधी विद्यालय, कारागार एवं अन्य संस्थाओं में इन इन उत्पादों का प्राथमिकता के आधार पर प्रयोग कराए जाने का भी प्रयास जारी है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए परियोजना अंतर्गत उत्पादित गुड को खाड़ी देशों में निर्यात करने के उद्देश्य से नमूना भेजा गया जहां से बड़ी मात्रा में गुड़ की मांग प्राप्त हुई है और इसकी पूर्ति हेतु परियोजना के किसानों के माध्यम से गुड़ का उत्पादन करा कर निर्यात किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान रबी सीजन में किसानों को गेहूं एवं सरसों का बायोफोर्टीफाइड प्रजाति के बीज उपलब्ध कराकर क्लस्टर रूप में उत्पादन कराया जा रहा है, जिससे उच्च गुणवत्ता एवं पोषकयुक्त उत्पादन प्राप्त होगा।
योजना के चयनित किसानों के साथ-साथ जनपद के अन्य किसानों में जैविक खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से इस क्षेत्र के आईकान पदमश्री श्री भारत भूषण त्यागी जी के साथ किसानों का संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें आयुक्त मुरादाबाद मंडल मुरादाबाद एवं जिलाधिकारी, बिजनौर तथा जनपद के अग्रणी जैविक कृषि कर रहे किसानों द्वारा भी प्रतिभाग किया गया।
जिलाधिकारी द्वारा जनपद में जैविक कृषि को बढ़ावा देने एवं इसकी संभावना के उद्देश्य से जैविक पद्धति से खेती कर रहे जनपद के सभी किसानों को इस कार्यक्रम से जोड़े जाने और परियोजना अंतर्गत अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ जैविक उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और जैविक उत्पादों के प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, भंडारण व परिवहन हेतु आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने की मांग की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी श्री के पी सिंह, उप कृषि निदेशक श्री गिरीश चंद, जिला कृषि अधिकारी/जिला परियोजना समन्वयक, डॉ अवधेश मिश्र, जिला परियोजना प्रभारी श्री लवकुश मिश्रा एवं परियोजना के अग्रणी कृषको द्वारा प्रतिभाग किया गया।
विकास अग्रवाल की रिपोर्ट


















