भोपाल: ये मामला एक साथ कई विसंगतियों को खारिज करता नजर आता है। निस्वार्थ की गई नेकी हमेशा दरिया में नहीं जाती। पुलिस का चेहरा उतना वीभत्स नहीं होता, जितना उसके लिए धारणा बना ली गई है और महामारी काल में अस्पतालों ने नोट छापने को ही अपना ईमान बना लिया है। राजधानी भोपाल में हुए एक मामले ने जहां पुलिस का मानवता वाला चेहरा सामने रखा है, वहीं अस्पतालों के पूरी तरह निष्ठुर हो जाने की बात को भी झुठलाया है। कहानी के केंद्र बिंदु में वह शख्स है, जो करीब १४ साल से लोगों की निस्वार्थ सेवा कर रहा था। महामारी की जकड़ में आया तो पुलिसकर्मी उसके लिए पैसों के इंतजाम में जुटे दिखाई दिए, तो अस्पताल प्रबंधन ने निशुल्क इलाज की सुविधा मुहैया कराकर अपना नैतिक दायित्व निभा दिया।
मामला राजधानी के ईंट खेड़ी थाना का है। हरिओम नाम है उस व्यक्ति का, जो किशोरावस्था से इस पुलिस थाने के कर्मचारियों की सेवा में डटा रहा है। पानी पिलाने और चाय-नाश्ते के साथ ही खाना बनाकर खिलाने का उसका यह सिलसिला करीब 14 साल से जारी है। संकट की इस घड़ी में उस युवक को भी कोरोना वायरस ने अपनी चपेट में ले लिया, लेकिन पैसों के अभाव में वह अपना इलाज नहीं करवा पा रहा था। ऐसे में पुलिसकर्मियों ने इसकी मदद के लिए कदम बढ़ाए। थाने की टीम ने सोशल मीडिया पर एक कैंपेन शुरू किया और 24 घंटे के भीतर करीब 70 हजार रुपयों का इंतजाम कर लिया।
थाना ईंटखेड़ी के आरक्षक मलखान दांगी ने बताया कि यहां पर जब चौकी थी, तब से ही हरिओम यहां पर काम कर रहा है। वह थाने के पास ही एक कमरे में रहता है और वह तब से ही पुलिस कर्मचारियों की सेवा में लगा हुआ है। हरिओम की जान बचाने के लिए थाने के एसआई सुनील चतुर्वेदी ने सुझाव दिया कि सोशल मीडिया पर कैम्पेनिंग की जाए। जिसके बाद एएसआई रघुवंशी, आरक्षक मलखान सिंह दांगी, रोहित कुमार साहू, शैलेंद्र सिंह सिसौदिया आदि ने मिलकर सोशल मीडिया पर रुपयों का इंतजाम करने के लिए कैंपेन चलाया और चौबीस घंटे के अंदर करीब सत्तर हजार रुपये जुटा लिए। उनके इस प्रयास में पुलिस कर्मचारियों के साथ ही कई अन्य लोग भी मदद के लिए आगे आए हैं। उन्हें उम्मीद है कि हरिओम के इलाज का खर्चा उनकी टीम जुटा लेगी और उसे सुरक्षित बचा लिया जाएगा।
डोनेशन के लिए सिपाहियों ने जारी किए मोबाइल नंबर
आर्थिक मदद जुटाने के लिए आरक्षकों ने दो मोबाइल नंबर जारी किए हैं। कोई भी व्यक्ति आरक्षक मलखान सिंह दांगी के मोबाइल नंबर 97133 09820 और रोहित कुमार साहू के मोबाइल नंबर 78696 68545 पर अपनी इच्छानुसार आॅनलाइन पैमेंट भेज सकता है। स्टाफ द्वारा अपने साथी कर्मचारियों से मदद की अपील की गई है।
70% लंग्स में है इंफेक्शन
एएसआई रघुवंशी ने बताया कि एक दिन पता चला कि हरिओम अपने घर पर है उसकी तबीयत खराब है। हम लोग उसके घर पहुंचे और उसको अस्पताल लाए। उसके बाद उसका सीटी स्कैन कराया तो पता चला कि उसके लंग्स में करीब 70 प्रतिशत इंफेक्शन हो चुका है। उसे इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल द्वारा प्रारंभिक तौर पर इलाज मे एक लाख रुपये से ज़्यादा खर्च बताया आ सकता है।
डॉक्टर ने अस्पताल का बिल माफ करने की कही बात
हरि ओम का इलाज कर रहे आयुष्मान भारत के डॉक्टर वीरेंद्र सैनी का कहना है कि हमारे अस्पताल ने यह निर्णय लिया है कि हम हरिओम से अस्पताल का कोई भी बिल नहीं लेंगे उसका हम निशुल्क इलाज करेंगे बाकी जो अन्य शुल्क होते हैं वह दवाइयां होती हैं वह थी लाना पड़ेगी।
रिपोर्ट खान आशु


















