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भागदौड़ वाली जिंदगी में जनता स्वास्थ्य के प्रति नहीं सचेत

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AIRA NEWS NETWORK – आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में आमतौर पर हम अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा सचेत नहीं हो पाते है। हम सभी जो भी कुछ खाते पीते है उसका हमारे स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है। डॉ. के के सिंह कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र नगीना ने बताया कि यदि यहां पर हम बात खाने योग्य तेल की बात करें तो खाने योग्य तेल में एक तत्व ऐसा पाया जाता है जिसको कि ईरुसिक एसिड बोलते है, जिसकी मात्रा 40% के ऊपर होने पर यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार सिद्ध होती है। सामान्यतः सरसों की जितनी भी प्रजातियां पाई जाती हैं चाहे उसमें काली हो या पीली वाली प्रजाति हो उन सब में यह 40% के ऊपर ही पाई जाती है।

इसके साथ दूसरा तत्व ग्लूकोसिलोनेट्स होता है, जिसकी मात्रा सामान्य सरसों में 120 पीपीएम से अधिक होता है, यदि जैसे सरसों की खल का प्रयोग पशु करते हैं तो उनके पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है। यह सामान्य तौर पर यह 30 पीपीएम से कम होना चाहिए। सरसों में यदि ईरुसिक एसिड की मात्रा 2% से कम हो एवं ग्लूकोसिलोनेट्स की मात्रा 30 पीपीएम से नीचे होती है तो ऐसी प्रजाति को डबल जीरो सरसों बोलते हैं। ऐसे सरसों का प्रयोग करने से स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा लाभदायक सिद्ध होता है, क्योंकि ऐसे तेल का प्रयोग करने से शरीर के अंदर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नहीं बढ़ती है। इस प्रजाति को पूसा डबल जीरो सरसों-31 के नाम से जाना जाता है। इस सरसों की इस प्रजाति से लगभग 23 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से उपज प्राप्त की जा सकती है। यह 140 से 145 दिन के अंदर पक कर तैयार हो जाती है।इसका दाना हल्का पीला एवं देखने में पतला होता है।

People are not health conscious in the run-of-the-mill life
भागदौड़ वाली जिंदगी में जनता स्वास्थ्य के प्रति नहीं सचेत

रिसर्च परीक्षण के अनुसार इसमें तेल की प्रतिशत की मात्रा 41% तक पाई गई है।सरसों की खेती करते समय किसान भाई इस बात का ध्यान अवश्य रखें इस सरसों के बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर ढाई से 3 किलोग्राम ही रखें। इस प्रजाति की बुवाई कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 सेंटीमीटर रखें। बुवाई के समय 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस एवं 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।

साथ ही साथ इसमें लगभग 30 से 40 किलोग्राम सल्फर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। स्वास्थ्य के लिए हितकर व अधिक उत्पादन वाली सरसों की प्रजाति पूसा डबल जीरो सरसों-31 का उत्पादन करें।

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