Heavy return with no risk portfolio diversification more important now investment and return know why rrmb

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नई दिल्ली. निवेश में विविधता (Diversification Of Investments) निवेशक के जोखिमों को कम करती है. इसलिए एक निवेशक के पोर्टफोलियो (Portfolio Diversification) में न केवल कई तरह के स्टॉक्स (Stocks Investment) होने चाहिए बल्कि उसे कई देशों और एसेट्स (Assets Investment) में भी निवेश करना चाहिए. यह निष्कर्ष है क्रेडिट सुइस ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिटर्न्स ईयर बुक 2022 (Credit Suisse Global Investment Returns Year book 2022) का. इसमें कहा गया है कि सभी देशों के निवेशकों को कम जोखिम पर समान रिटर्न (Investment and Return) मिलता है या फिर समान रिस्क पर ज्यादा रिटर्न मिलता है.
क्रेडिट सुइस का कहना है कि अस्थिरता (Volatility) में इजाफा, महंगाई (Inflation) में लगातार बढोतरी और दरों में वृद्धि की संभावनाओं वाली परिस्थितियों में तो पोर्टफोलियो डाइवर्टिफिकेशन (Portfolio Diversification) और भी जरूरी हो जाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि छोटे और विकासशील देशों के निवेशकों को वैश्विक निवेश से विकसित देशों के निवेशकों के मुकाबले ज्यादा फायदा होता है.
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वैश्विक निवेश
क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर हम अंतरराष्ट्रीय विविधिकरण की बात करें तो आज वैश्वीकरण इस हद तक बढ़ गया है कि बाजार एक साथ चलते हैं और संभावित जोखिम को कम करता है. अंतरराष्ट्रीय निवेश (International Investing) के बहुत बड़े फायदे हैं, हालांकि इनको गारंटिड नहीं माना जा सकता. रिपोर्ट में कहा गया की, ‘हमने देखा है कि पिछले 50 वर्षों में ज्यादातर देशों में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ने ज्यादा शार्प रेशो घरेलू निवेश के मुकाबले दिया है.’ शार्प रेशो किसी पोर्टफोलियो रिस्क-एडजस्टिड रिटर्न्स की ओर संकेत करता है. विकसित बाजारों और विकासशील देशों के बीच सह-संबंधों की ओर इशारा करते हुए क्रेडिट सुइस की यह रिपोर्ट कहती है कि बढ़ते हुए सह-संबंधों के बावजूद संभावित डाइवर्सिफिकेशन लाभ बहुत बड़े हैं.
विकासशील देशों के निवेशकों को ज्यादा फायदा
छोटे और विकासशील बाजारों के निवेशक ग्लोबल डाइवर्सिफिकेशन से विकसित देशों के निवेशकों के मुकाबले ज्यादा फायदा उठा सकते हैं. रिपोर्ट का कहना है कि छोटे देशों के बाजार कंपनियों के साथ ही सेक्टर्स पर भी निर्भर होते हैं. क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट में कहा गया है कि एफटीएसई वर्ल्ड इंडिया इंडेक्स (FTSE World India index) में टेक्नोलॉजी (technology) का मार्केट कैपिटेलाइजेशन में 19 फीसदी हिस्सा है. वित्तीय कंपनियों (financials companies) का हिस्सा 19 फीसदी है और इंडस्ट्रियल सेक्टर (industrials sector) की भागीदारी 12 फीसदी है.
क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट में बड़ी भारतीय कंपनियों के बारे में भी बताया गया है. रिलायंस इंडस्ट्रिज लिमिटेड का इंडेक्स पर भागीदारी 10 फीसदी है तो इन्फोसिस की 8 फीसदी और हाउसिंग फाइनांस कॉर्पोरेशन की हिस्सेदारी 6 फीसदी है.
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Tags: Foreign portfolio, Investment and return, Personal finance
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