AIRA NEWS NETWORK – करनाल को हरा-भरा बनाने के लिए जिला के गांव रायपुर रोड़ान में गुरूवार को उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में नीम का पौधा लगाकर, हरित करनाल अभियान की शुरूआत की। अभियान के तहत अगले एक पखवाड़े में एक लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
खास बात यह है कि पहली बार ऐसी व्यवस्था की गई है, जिससे न केवल बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाने की पुष्टिï होगी, अपितु उनकी मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए बाकायदा एक पोर्टल बनाया गया है, जिस पर रोजाना लगाए जाने वाले पौधों की फोटो समेत जानकारी डाली जाएगी और उपायुक्त स्वयं उसकी मॉनिटरिंग करेंगे। इस अवसर पर अभियान के नोडल और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक जूबिन और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भी पौधे लगाए।
पौधोरोपण के लिए बनाए गए 79 कलस्टर- उपायुक्त ने बताया कि हरित करनाल अभियान के तहत पूरे जिला को 79 कलस्टर में बांटा गया है, जिसमें सभी 384 पंचायतें शामिल हैं। इसके तहत गांव के स्कूल, जोहड़, शमशान घाट, सड़क, पशु अस्पताल, आंगनवाड़ी, धार्मिक स्थल और जहां भी जगह उपलब्ध होगी, पौधे लगाए जाएंगे। पौधे वन विभाग की ओर से निशुल्क उपलब्ध रहेंगे।
ऐसे होगा पौधो का रख-रखाव- उपायुक्त ने बताया कि वैसे तो हर वर्ष बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन उनका रख-रखाव सुनिश्चित नहीं हो पाता, परिणामस्वरूप 15 से 20 प्रतिशत पौधे ही जीवित रहते हैं। लेकिन इस बार लगाए गए पौधों के रख-रखाव के लिए जिम्मेदारी तय की गई हैं, जिसे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, स्वच्छ भारत मिशन के कार्यकर्ता और मनरेगा जिम्मेवारी निभाएंगे। सभी ग्राम सचिवों का इसमें सहयोग रहेगा।

ऑक्सी वन की होगी शुरूआत- उन्होंने बताया कि जिला के 2 गांवो में ट्रायल के तौर पर जल्द ही ऑक्सी वन की शुरूआत करने जा रहे हैं। दोनो गांव में 5-5 एकड़ भूमि में पौधारोपण किया जाएगा और उनकी देखभाल भी सुनिश्चित होगी। ऑक्सी वन एक ऐसी जगह होगी, जो जीवन और पौधों तथा इनके महत्व के बीच सदियों पुराने सम्बंधों से जुडऩे में मदद करेगा। यह वर्तमान समय में वनस्पतियों के महत्व बारे संवेदनशील बनाने में भी सहायक होगा।
बच्चों की तरह पालेंगे पौधे- पौधारोपण के बाद विद्यालय में उपायुक्त ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि पौधा लगाना एक पुण्य का कार्य है, इसका वर्णन हमारे धर्म-ग्रंथो में भी मिलता है। उन्होंने कहा कि पहले गांवो में पौधे लगाने का रिवाज होता था, जो धीरे-धीरे लुप्त हो रहा है।
लोगों को शुद्घ व पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलती थी और वे बीमारियों से दूर रहते थे। अब कोरोना के बाद ऑक्सीजन की कीमत पता चलने पर लोगों को दोबारा पौधों के महत्व को समझना पड़ा। इसलिए जो भी पौधा लगाया जाए, हर महिला उसे बच्चे की तरह पाले, समय पर पानी दें, पशुओं से बचाने के लिए उसके आस-पास ईंटों या कांटो की बाड़ लगाएं और दिसम्बर-जनवरी के महीने में उसे कड़ी सर्दी से बचाएं। एक-दो सीजन के बाद पौधा स्वत: ग्रोथ कर बड़ा होने लगता है और फिर वृक्ष बन जाता है।
महिलाओं ने लिया हरित-संकल्प- कार्यक्रम में उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने एकत्रित एस.एच.जी. महिलाओं को, लगाए गए पेड़ और स्वजनो की भांति उनका ख्याल रखने तथा अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ व निर्मल बनाए रखने के लिए हरित-संकल्प करवाया। महिलाओं ने दूध दही का खाना-मेरा हरा-भरा हरियाणा स्लोग्न भी उच्चारित किया।
इस अवसर पर ए.डी.आई.ओ. परविन्द्र सिंह, सहायक खण्ड परियोजना कॉर्डिनेटर रेणु कम्बोज, सरपंच सुरेश कुमार तथा गांव वासी भी उपस्थित रहे।


















