प्रसव के बाद महिला की मौत का मामला मानवाधिकार आयोग पहुंचा-स्योहारा के अफशा नर्सिंग होम में महिला की मौत पर डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत पंजीकृत

प्रसव के बाद महिला की मौत का मामला मानवाधिकार आयोग पहुंचा
स्योहारा के अफशा नर्सिंग होम में महिला की मौत पर डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत पंजीकृत
स्योहारा। अफशा नर्सिंग होम में प्रसव/ऑपरेशन के बाद महिला की मौत का मामला अब उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। मामले में वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स (WAOHR) के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. तारिक़ ज़की की ओर से प्रस्तुत शिकायत को आयोग ने पंजीकृत करते हुए डायरी नंबर 6560/IN/2026 तथा केस/फाइल नंबर 17952/24/17/2026 जारी किया है।
डॉ. तारिक़ ज़की ने विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रकाशित रिपोर्टों को आधार बनाकर आयोग से मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार प्रसव के बाद महिला की हालत बिगड़ी और उसकी मृत्यु हो गई। परिजनों की ओर से कथित चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए गए थे, जबकि चिकित्सक पक्ष की ओर से मृत्यु का कारण हार्ट अटैक/हृदय संबंधी समस्या बताया गया था।

शिकायत में किसी चिकित्सक या नर्सिंग होम को पहले से दोषी नहीं ठहराया गया है। बल्कि मृत्यु के वास्तविक कारण और उपचार की पूरी प्रक्रिया की चिकित्सकीय जांच कराने पर जोर दिया गया है।
शिकायत में महिला से संबंधित संपूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड, भर्ती एवं केस शीट, प्रसव/ऑपरेशन रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, दवा एवं नर्सिंग रिकॉर्ड, मॉनिटरिंग चार्ट, रेफरल रिकॉर्ड तथा मृत्यु से संबंधित अभिलेख सुरक्षित कराने की मांग की गई है।
इसके अलावा इन अभिलेखों का परीक्षण स्वतंत्र विशेषज्ञ चिकित्सकीय बोर्ड अथवा सक्षम राजकीय चिकित्सा संस्थान** से कराने का अनुरोध किया गया है, ताकि यह पता चल सके कि महिला की मृत्यु का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था और उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सा मानकों का पालन हुआ या नहीं।
शिकायत में संबंधित नर्सिंग होम के पंजीकरण और अनुमति की वैधता, प्रसव एवं ऑपरेशन के लिए उपलब्ध आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं, प्रशिक्षित स्टाफ तथा आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की भी जांच की मांग की गई है।
साथ ही घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई निरीक्षण अथवा जांच की गई या नहीं, इसकी जानकारी भी मांगी गई है। इस तरह मामले में निजी संस्थान के साथ-साथ संबंधित स्वास्थ्य विभाग की नियामकीय जिम्मेदारी को भी जांच के दायरे में रखने की मांग की गई है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि चिकित्सकीय घटना के बाद परिजनों और चिकित्सक पक्ष के बीच हुई आपसी बातचीत या आर्थिक सहायता को अपने आप में चिकित्सकीय लापरवाही का प्रमाण नहीं माना जा सकता। हालांकि गंभीर घटना के बाद यदि मामला आपसी सहमति से शांत हुआ हो तो यह भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि सहमति किसी दबाव या अनुचित प्रभाव में तो नहीं हुई।
फिलहाल शिकायत के पंजीकरण और केस/फाइल नंबर जारी होने के बाद मामले में आयोग की आगामी कार्रवाई का इंतजार है। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अभी किसी चिकित्सक, नर्सिंग होम अथवा अन्य व्यक्ति के विरुद्ध दोष सिद्ध नहीं हुआ है और न ही आयोग द्वारा कोई अंतिम निष्कर्ष जारी किए जाने का दावा किया गया है।
डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत का उद्देश्य भी बिना जांच किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि मृत्यु के वास्तविक कारण और उपचार की प्रक्रिया को तथ्यात्मक एवं स्वतंत्र जांच के माध्यम से सामने लाना बताया गया है। यदि जांच में मृत्यु हार्ट अटैक अथवा किसी अपरिहार्य चिकित्सकीय कारण से होना पाया जाता है तो संबंधित चिकित्सक एवं संस्थान को भी आरोपों से राहत मिल सकती है। वहीं लापरवाही अथवा नियामकीय कमी सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
अब निगाहें मानवाधिकार आयोग की आगामी कार्रवाई और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों से मांगी जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं।
नोट: समाचार उपलब्ध आयोग रिकॉर्ड, शिकायत और प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी चिकित्सक, नर्सिंग होम या अन्य व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एवं संबंधित प्राधिकारी की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।


















