आईयूसीटीई बीएचयू में एडटेक कनेक्ट अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन

12 देशों के शिक्षकों की भागीदारी से एडटेक कनेक्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न ||
तकनीक के साथ शिक्षक की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहेगी – प्रो.डी.पी.सिंह ||
वैश्विक दक्षिण को सशक्त बनाने पर केंद्रित सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न ||
बीएचयू के आईयूसीटीई में अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 12 देशों के 25 शिक्षक हुए शामिल ||
वाराणसी :- अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई) वाराणसी में “द एडटेक कनेक्ट एम्पावरिंग द ग्लोबल साउथ विषय पर सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हुआ | समापन सत्र का शुभारम्भ मंगलाचरण व मां सरस्वती तथा महामना पं.मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया | इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.डी.पी.सिंह कुलाधिपति टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) मुंबई तथा पूर्व चेयरमैन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नई दिल्ली थे |
इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी कुलपति काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी रहे | इस सत्र की अध्यक्षता प्रो.प्रेम नारायण सिंह निदेशक आईयूसीटीई वाराणसी ने की | प्रो.आशीष श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की कुछ प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव को साझा किया | तत्पश्चात मुख्य अतिथि,विशिष्ट अतिथि निदेशक आईयूसीटीई बीएचयू और डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान) द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया |
डॉ.राजा पाठक सहायक आचार्य आईयूसीटीई ने कार्यक्रम का मंच संचालन किया | इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.डी.पी.सिंह कुलाधिपति टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) मुंबई ने अपने संबोधन में शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के नैतिक उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के बावजूद शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण बनी रहेगी उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का अंतिम उद्देश्य “सर्वजन हिताय,सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत को साकार करना होना चाहिए |
विशिष्ट अतिथि प्रो.अजीत कुमार चतुर्वेदी कुलपति काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही ज्ञान और शिक्षा की समृद्ध परंपरा रही है उन्होंने बताया कि इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज देश फिनटेक और एडटेक जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है | इस अवसर पर उन्होंने आईयूसीटीई तथा कार्यक्रम में सहभागिता करने वाले सभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई दी | प्रो.प्रेम नारायण सिंह निदेशक आईयूसीटीई वाराणसी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया | अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ज्ञान योग और कर्म योग का अमूल्य ज्ञान भारत ने विश्व को प्रदान किया है |
इस कार्यक्रम में श्रीलंका,कम्बोडिया, घाना,किर्गिस्तान,मॉरीशस,थाईलैंड, युगांडा,उज्बेकिस्तान,ताजिकिस्तान, इथियोपिया और ट्यूनीशिया 12 देशों के 25 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया |
कार्यक्रम के निदेशक प्रो.आशीष श्रीवास्तव,संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध),आईयूसीटीई रहे जबकि इसका समन्वयन डॉ.राजा पाठक, सहायक आचार्य,आईयूसीटीई द्वारा द्वारा किया गया | सह-समन्वयक के रूप में डॉ.सुनील कुमार त्रिपाठी सहायक आचार्य आईयूसीटीई अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी | केंद्र के अन्य समस्त संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों ने भी इस अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफल आयोजन प्रक्रिया में सक्रिय योगदान दिया |
इस कार्यक्रम में प्रो.जे.पी.लाल,प्रो. राजनाथ सिंह,प्रो.दीनानाथ सिंह,प्रो.उमेश त्रिपाठी,प्रो.अजय कुमार सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे ||


















