वाराणसी/उत्तरप्रदेशशहर

भारतीय ज्ञान परम्परा व भाषायी पुनर्कल्पना पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेज़बानी करेगा बीएचयू

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वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कला संकाय द्वारा केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूरु के सहयोग से तथा शिक्षा मंत्रालय के संरक्षण में एनईपी–2020 के अंतर्गत भारतीय भाषाओं, ज्ञान और अंतर्विषयकता का पुनर्कल्पन: दार्शनिक विमर्श और शैक्षिक रूपांतरण” विषयक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 12 से 14 फरवरी 2026 तक वाराणसी में किया जाएगा।

यह सम्मेलन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी के मुख्य संरक्षण में आयोजित होगा। सम्मेलन के संरक्षक सीआईआईएल के निदेशक प्रो. शैलेंद्र मोहन होंगे। सह-संरक्षक के रूप में बीएचयू के रेक्टर प्रो. संजय कुमार तथा कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। सम्मेलन की अध्यक्षता कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सुषमा घिल्डियाल करेंगी जबकि बीएचयू के भाषाविज्ञान विभाग के प्रो. अभिनव कुमार मिश्र सम्मेलन संयोजक की भूमिका निभाएंगे।

यह सम्मेलन एक वैश्विक अकादमिक संवाद के रूप में परिकल्पित है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की परिवर्तनकारी दृष्टि के आलोक में भारतीय ज्ञान परम्परा, बहुभाषिकता, ज्ञानात्मक न्याय (एपिस्टेमिक जस्टिस) तथा अंतर्विषयकता पर गंभीर विमर्श करना है।

सम्मेलन भारत की प्राचीन सभ्यतागत बौद्धिक विरासत का पुनर्पाठ करते हुए उसे समकालीन वैश्विक शैक्षिक एवं वैचारिक परिप्रेक्ष्य में प्रतिष्ठित करने का प्रयास करेगा।

इस अकादमिक आयोजन में भारतीय भाषाओं को ज्ञान-निर्माण और बौद्धिक विमर्श के जीवंत माध्यम के रूप में रेखांकित किया जाएगा। औपनिवेशिक ज्ञान पद्धति को चुनौती देते हुए भाषाई बहुलता और भाषायी गरिमा की पुनर्स्थापना पर भी विचार होगा। विद्वान इस बात पर विमर्श करेंगे कि भाषा किस प्रकार संज्ञान, नैतिकता और अर्थ-निर्माण को आकार देती है तथा भारतीय भाषाओं की पुनर्प्रतिष्ठा समावेशी और गरिमामय शिक्षा की दिशा में कैसे सहायक हो सकती है।

सम्मेलन का एक प्रमुख केंद्रबिंदु ज्ञान और ज्ञानमीमांसा का पुनर्संरचन होगा, जिसमें भारतीय ज्ञान प्रणालियों और आधुनिक विषयों के समन्वय पर विशेष बल दिया जाएगा। उपनिषदों, न्याय दर्शन, आयुर्वेद और गुरुकुल परंपरा जैसी प्राचीन ज्ञान-धाराओं से लेकर मानविकी, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान की समकालीन प्रविधियों तक संवाद स्थापित किया जाएगा, जिससे एक गतिशील, व्याख्यात्मक और रूपांतरकारी बौद्धिक दृष्टि विकसित हो सके।

एनईपी–2020 की भावना के अनुरूप, यह सम्मेलन अंतर्विषयकता को विश्वविद्यालयी शिक्षा की आत्मा के रूप में देखता है—जहाँ ज्ञान खंडित इकाइयों में नहीं, बल्कि समन्वित बौद्धिक पारिस्थितिकी के रूप में विकसित होता है।

विमर्श इस बात पर केंद्रित होंगे कि अंतर्विषयक दृष्टिकोण किस प्रकार जटिल सामाजिक, नैतिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं तथा भारत को वैश्विक शैक्षिक भविष्य के एक महत्वपूर्ण पथप्रदर्शक के रूप में स्थापित कर सकते हैं।

मुख्य वक्तव्यों, पैनल चर्चाओं और विषयगत सत्रों के माध्यम से यह सम्मेलन भारत और विदेशों से शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, शिक्षकों और सांस्कृतिक कर्मियों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। यह आयोजन एनईपी–2020 के समावेशी, समग्र और मूल्य-आधारित शिक्षा के दृष्टिकोण को व्यवहार में उतारने हेतु परिवर्तनकारी निष्कर्षों और व्यावहारिक दिशानिर्देशों को एक स्वरूप देने का प्रयास करेगा।

Sallauddin Ali

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