कला संकाय द्वारा ‘संस्कृति 2026’ का उद्घाटन, उत्सव का भव्य शुभारंभ

वाराणसी, 5 फरवरी 2026। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक कला संकाय—जिसे विश्वविद्यालय की ‘जननी संकाय’ के रूप में जाना जाता है—के वार्षिक युवा उत्सव ‘संस्कृति–2026’ का 5 फरवरी, गुरुवार को औपचारिक शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय यह युवा महोत्सव 5 से 7 फरवरी 2026 तक भारत अध्ययन केंद्र तथा मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में आयोजित किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र का आरंभ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के आदर्शों के स्मरण के साथ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. रंजन कुमार (डीन, छात्र कल्याण, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) ने प्रो. सुषमा घिल्डियाल (प्रमुख, कला संकाय), डॉ. शैलेंद्र सिंह (छात्र सलाहकार) तथा डॉ. शिल्पा सिंह की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन कर किया। अतिथियों का स्वागत छात्र समन्वयकों द्वारा अंगवस्त्र भेंट कर किया गया। इसके पश्चात कुलगीत का गायन प्रस्तुत किया गया। इसी क्रम में समारोह के संयोजक डॉ. धीरेन्द्र राय ने प्रस्तावना वक्तव्य प्रस्तुत में कहा कि ‘संस्कृति’ महोत्सव का उद्देश्य युवाओं को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए कलात्मक अभिव्यक्ति के लिए व्यापक मंच उपलब्ध कराना है।
मुख्य अतिथि डॉ. रंजन कुमार ने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होना चाहिए। उन्होंने छात्रों से अध्ययन के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया और अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक भूमिका पर प्रकाश डाला।
कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कला संकाय की अकादमिक एवं सांस्कृतिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘संस्कृति’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि संकाय की विशिष्ट पहचान है, जो पूरे विश्वविद्यालय में इसकी विशेष उपस्थिति को दर्शाती है। उन्होंने प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. शैलेंद्र विश्वनाथ सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथियों, शिक्षकगण, प्रतिभागियों तथा वालंटियरों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह बताया कि कार्यक्रम के वास्तविक नायक स्वयंसेवक हैं, जिनके समर्पण से आयोजन संभव हो पाया।
उद्घाटन कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण इंद्रजीत साकेत का सम्मान था, जो एक दृष्टिबाधित संगीतकार हैं और जिन्हें हाल ही में तांडव स्तोत्रम की प्रस्तुति के लिए सोशल मीडिया पर काफी पहचान मिली है। उनके लाइव परफॉर्मेंस में भंवरवा के तोहरा संग जाई जैसे लोक गीत शामिल थे। सांस्कृतिक कार्यक्रम में पारंपरिक सोहर गीत जुग जुग जिया सु ललनवा और मशहूर लोक गायिका शारदा सिन्हा को संगीतमय श्रद्धांजलि भी दी गई।
महोत्सव के प्रथम दिन शास्त्रीय संगीत, लोक नृत्य तथा भारतीय भाषाई विविधता को प्रदर्शित करने वाले विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। विश्वविद्यालय के कला संकाय से बड़ी संख्या में छात्रों की सहभागिता रही। प्रातः 9:30 बजे से महामना अनुशीलन केंद्र सहित विभिन्न स्थलों पर जनरल क्विज के प्रथम चरण, टर्न कोट (हिन्दी), वाक्-कला एवं अंग्रेज़ी वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ आयोजित हुईं। शास्त्रीय वाद्य यंत्रों एवं वेस्टर्न वोकल सोलो की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को आकर्षित किया। ओपन थिएटर में आयोजित पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। उद्घाटन सत्र का संचालन अनुराग राय और अनन्या ज्योति ने किया।


















