असम/गुवाहाटी

असम की पटकाई पहाड़ियां बनी मौत की घाटी:अवैध कोयला खदानों में दो और मजदूरों की हुई मौत।

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असम की पटकाई पहाड़ियां मौत की घाटी बन गई हैं: अवैध कोयला खदानों में दो और मजदूरों की हुई मौत।

पंकज नाथ, असम, 20 सितंबर :

असम के तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा में विभिन्न स्थानों पर कोयले की अवैध व्यापार और तस्करी जारी है। कोयले की अवैध तस्करी में कुछ प्रभावशाली नेताओं के शामिल होने की संभावना है। सूत्रों का आरोप है कि राजनेताओं की छत्रछाया में मार्गेरिटा के नामडांग, लिदू के चीनाबस्ती, जर्नाबस्ती, मोलांग, तेलखतबस्ती, तिरप 6 आदि क्षेत्रों में कोयले की अवैध बिक्री फैल गई है। सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन की ढीली नीति के कारण कोयला माफिया अपने दहलीज पार कर चुके हैं। कोन पुलिस ! कौन सा प्रशासन? सभी को अंगूठा दिखाते हुए कुछ कोयले के चोरों ने लिडू में विभिन्न स्थानों पर अवैध रूप से कोयला खदानों (खदान) का अवैध निर्माण किया है। यह बात सामने आई है कि कोयला माफिया ने चतुराई से विभिन्न पक्षों का प्रबंधन करके एक बड़ा कोयला सिंडिकेट बनाया है। अलग-अलग समय पर अवैध कोयला खदानों में भूस्खलन और मीथेन गैस के रिसाव के कारण कई श्रमिकों की मौत हो गई है। कोयला माफिया इनमें से कई दुर्घटनाओं पर चोरी-छिपे पर्दा डालने की कोशिश करते हैं हालांकि, कुछ मामले प्रकाश में आ जाते हैं । खासकर इसलिए कि तस्करी से लाए गए कोयला उत्पादक क्षेत्र असम और अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में स्थित हैं, इसलिए दुर्घटनाओं में मारे गए मजदूरों के शवों को अरुणाचल के गहरे जंगलों में जानवरों की तरह दफनाया जाता है। जिसके कारण इस तरह की घटनाएं सामने नहीं आती हैं। ऐसी ही एक घटना कल मंगलवार को दोपहर के समय पटकाई पहाड़ियों के तिपोंग इलाके में फिर हुई। तिपोंग में साली के पास खदान नंबर 12 में एक अवैध कोयला खदान में गैस लीक होने से दो मजदूरों की मौत हो गई और एक घायल हो गया। मृतकों में से एक की पहचान मेघालय के मेंदीपथार के राजू राभा और गोवालपाड़ा जिले के धूपधारा के धीरेश्वर कछारी के रूप में हुई है। अवैध कोयला खदान में काम करने के दौरान मीथेन गैस निकलने से मजदूरों की मौत हो गई। यह एक रहस्य है कि इस मामले में, मजदूरों के शवों को रात के दौरान मालिकों द्वारा गुप्त रूप से दफनाने का आरोप उठा हैं । इस बीच, घटना में एक श्रमिक के घायल होने की बात सामने आई है, लेकिन मालिक पक्ष ने घायल श्रमिक के बारे में कोई पहचान या सुराग सार्वजनिक नहीं किया है। मीडिया और सचेत जनता इसके पीछे के रहस्य को लेकर चिंतित है। पूरी घटना को कोयला खदान मालिक अंधेरे में रखना चाहता है। विभिन्न दलों को अत्यंत चतुराई से संभालने या मेनेज करने में लगे हुए हैं कुछ कोयला माफिया। अब सवाल यह है कि ऐसे समय में फिर से ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं, जब अवैध कोयला खदानों में श्रमिकों की मौत की खबरें सुर्खियां बनती रही हैं। लिडू के मार्गेरिटा में कोयले की अवैध बिक्री में वास्तव में कौन शामिल है? किसके छत्रछाया में अवैध कोयला सिंडिकेट फिर से शुरू हो गया है। अवैध कोयला सिंडिकेट में कौन शामिल है? पुलिस की चुप्पी को जागरूक समुदाय हल्के में नहीं ले रहा है । जागरूक जनता, एक दो आम कोयला चोरों को गिरफ्तार करके अपने जिम्मेदारी से मुह फेर रहे पुलिस की कड़ी आलोचना कर रहे हैं । इसके अलावा जागरूक जनता ने असम सरकार के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को इसपर जांच करके कोयले की कालाबाजारी को रोकने की मांग की है। जागरूक जनता ने यह भी कहा है कि अगर मुख्यमंत्री इसपर कारवाई करने से पीछे हटने के तो लोगों का शक जो प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं पर हें वह पक्का हो जायेगा। इतना सब कुछ होने के बावजूद राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा इस पर उचित कार्रवाई करने के लिए आगे आएंगे या नहीं, यही आगे देखने लायक होंगे ।

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