नई दिल्ली. यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका और यूरोप के देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों पर अब रूस ने भी प्रतिक्रिया दी है. रूस ने 200 से ज्यादा कार और ऑटो पार्ट्स के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया है. रूस-यूक्रेन संघर्ष से न केवल रूस में, बल्कि दुनिया भर में ऑटो इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ रहा है. इस फैसले से आने वाले दिनों में ऑटो निर्माताओं के सामने चल रहे सेमीकंडक्टर संकट और भी गहरा जाएगा.
कार और ऑटो पार्ट्स के निर्यात पर रूस का प्रतिबंध इस साल के अंत तक रहेगा. रूस की निर्यात सूची से हटाई गई वस्तुओं में वाहन, दूरसंचार, चिकित्सा, कृषि, इलेक्ट्रिक उपकरण और लकड़ी शामिल हैं. इसको लेकर रूस ने कहा कि उसने “रूस के खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई करने वाले राज्यों को कई प्रकार के लकड़ी और लकड़ी के उत्पादों के निर्यात को निलंबित कर दिया है.”
रूस के वित्त मंत्रालय ने कहा, “ये उपाय रूस के खिलाफ लगाए गए लोगों के लिए एक तार्किक प्रतिक्रिया है और इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों के निर्बाध कामकाज को सुनिश्चित करना है.”
यह कदम रूस द्वारा रूस से बाहर निकलने वाली पश्चिमी कंपनियों के स्वामित्व वाली सभी संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण करने की धमकी के बीच आया है. पिछले महीने संघर्ष बढ़ने के बाद से कई कार निर्माताओं ने रूस में ओपरेशन बंद करने का फैसला किया था. इन कंपनियों में Honda, Toyota, Volkswagen, General Motors, Jaguar Land Rover, Mercedes-Benz जैसे कार निर्माता शामिल हैं.
Jeep, Fiat और Peugeot जैसे ब्रैंड्स के मालिक Stellantis भी गुरुवार को इस लिस्ट में शामिल हो गए हैं. कंपनी ने कहा कि उसने रूस को कारों के आयात और निर्यात को निलंबित कर दिया है. स्टेलंटिस की रूस के कलुगा में एक मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट है, जिसका स्वामित्व मित्सुबिशी के साथ पार्टनरशिप में है.
रूस में प्रमुख विदेशी कार निर्माता में से एक, हुंडई ने हाल ही में घोषणा की कि वह आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान के कारण इसे कुछ समय के लिए रोकने के बाद उत्पादन फिर से शुरू करना चाह रही है. हालांकि, अगर कारों और ऑटो पार्ट्स के निर्यात पर रूस का प्रतिबंध रहता है, तो हुंडई के लिए परिचालन फिर से शुरू करना मुश्किल हो सकता है.


















