चांदी की बढ़ती कीमत : और : महर फ़ातमी-राशिद अर्शी
स्योहारा – निकाह के वक़्त जो सबसे अहम और नाजुक मसअला सामने आता है। वो महर का होता है। महर के बारे कहा जाता है कि महर लड़के की हैसियत के मुताबिक होने चाहिए ताकि लड़के के लिए मेहरों की अदायगी आसान हो। अब तक बेश्तर शादियों में सुन्नत-ए-नबवी सल0 के मुताबिक महर फ़ातिमी तय किये जाते रहे हैं। जिसमे तक़रीबन 1.531 किलो वज़न के बराबर चांदी हुवा करती है। अब तक चांदी का रेट 20 से 25 हज़ार रु0 हुआ करता था।


इसलिए महर फ़ातिमी को आसान महर माना जाता था और सुन्नत के मुताबिक अम्ल भी। लेकिन मौजूदा हालात में चांदी का रेट ( आज : 3लाख 20 हज़ार ) आसमान छू रहा है। अब इन हालात में इस बात पर बहुत सोच समझकर फैसला लेने की ज़रूरत है कि लड़के की हैसियत महर फ़ातिमी चुकाने लायक़ है या नही।






