सिविल सर्जन डॉ. पूनम चौधरी ने अत्याधुनिक अल्ट्रा पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का किया उद्घाटन

सिविल सर्जन डॉ. पूनम चौधरी ने अत्याधुनिक अल्ट्रा पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का किया उद्घाटन
एस आर योगी
जिला ब्यूरो करनाल
करनाल, 25 जून। सिविल सर्जन डॉ. पूनम चौधरी ने आज सिविल सर्जन कार्यालय में मेदांता फाउंडेशन द्वारा भेंट की गई एक अत्याधुनिक अल्ट्रा पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का उद्घाटन किया। इस दौरान डॉ. पूनम चौधरी ने मेदांता फाउंडेशन को उनके इस सराहनीय योगदान के लिए प्रशंसा पत्र भी प्रदान किया।
इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. पूनम चौधरी ने कहा कि कि यह एक्स-रे मशीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा संचालित है, जो 2-3 मिनट के भीतर एक्स-रे परिणामों की जानकारी प्रदान करेगी। मेदांता फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराए गए स्टाफ और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा इस मशीन का उपयोग गांव-गांव जाकर संभावित टी.बी. मरीजों की स्क्रीनिंग और एक्स-रे करने के लिए किया जाएगा तथा पुष्टि होने पर मरीजों को समय पर इलाज प्रदान किया जाएगा।
इस अवसर पर उप-सिविल सर्जन (टी.बी.) डॉ. सिम्मी कपूर ने टी.बी. रोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मेदांता फाउंडेशन ने इससे पहले भी एक मोबाइल क्लीनिक वैन भेजी है, जिसमें एक्स-रे और सीबीनाट की सुविधा उपलब्ध है। यह वैन जिला के गांवों और उच्च जोखिम वाले स्थानों पर जाकर संभावित मरीजों की जांच कर रही है।
डॉ. सिम्मी कपूर ने कहा कि यह एक संक्रामक रोग है जो टी.बी. के मरीज के खांसने और छींकने से फैलता है, जिससे संक्रमण हवा में आसानी से घुल जाता है। शुरुआत में यह बीमारी फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन बाद में बैक्टीरिया रक्त के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने टी.बी. के लक्षणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दो सप्ताह से अधिक खांसी होना,सांस लेने में परेशानी,वजन कम होना,दो सप्ताह तक बुखार रहना,भूख कम लगना,रात को पसीना आना,थकान महसूस होना,सीने में दर्द और सांस फूलना,बलगम में खून आना जैसे लक्षण महसूस होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करवाएं ताकि समय पर इलाज हो सके।
डॉ. कपूर ने बताया कि भारत में विश्व के सबसे अधिक टी.बी. के मरीज हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि यदि किसी व्यक्ति में टी.बी. के लक्षण पाए जाते हैं तो वह तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच और इलाज करवाएं। सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टी.बी. से संबंधित जांच और इलाज मुफ्त में किया जाता है। उन्होंने इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत सरकार ने टी.बी. को एक अधिसूचित बीमारी घोषित किया है, जिसके तहत सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और प्रयोगशालाओं को टी.बी. के मामलों की रिपोर्ट करना अनिवार्य है।


















