वाराणसी/उत्तरप्रदेशशहर

विधि संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन

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वाराणसी, 06.02.2026, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विधि संकाय द्वारा विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विकसित भारत के संदर्भ में न्यायपालिका की संवैधानिक भूमिका तथा सहयोगात्मक शासन में उसके योगदान पर सार्थक विमर्श को प्रोत्साहित करना है। साथ ही, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को समकालीन कानूनी एवं प्रशासनिक चुनौतियों की व्यावहारिक समझ प्रदान कर उनके अकादमिक एवं बौद्धिक विकास को सुदृढ़ करना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपने वक्तव्य में प्रश्नोत्तरी सत्र सराहना करते हुए नई शिक्षा नीति (NEP), इंटर्नशिप एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास पर बल दिया। प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि विधि संकाय में वह क्षमता है कि वह देश के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों को सशक्त प्रतिस्पर्धा दे सकता है। कुलपति ने आगे कहा, “हम महामना की विरासत पर आत्मसंतुष्ट होकर नहीं बैठ सकते, हमें कार्य करके स्वयं को सिद्ध करना होगा।”
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर, न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने “विकसित भारत के लिए सहयोगात्मक शासन में न्यायपालिका की भूमिका” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने न्यायपालिका की संवैधानिक भूमिका, सुशासन में उसकी सहभागिता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में उसके योगदान पर ऐतिहासिक उदाहरणों के साथ विस्तार से प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि श्री उपेन्द्र बघेल, आईपीएस, विशेष प्रतिवेदक, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने “अंतरराष्ट्रीय आपराधिक जांच और अभियोजन: कुछ अंतर्दृष्टियाँ” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साक्ष्यों की स्वीकार्यता, जांच एवं परीक्षण की प्रक्रिया से संबंधित व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर श्री बघेल ने कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी को एक पुस्तक के रुप में स्मृति-चिह्न भी भेंट किया।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण विधि संकाय के प्रमुख एवं विभागाध्यक्ष प्रो. सी. पी. उपाध्याय द्वारा तथा संचालन व धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर क्षेमेन्द्र मणि त्रिपाठी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर विधि संकाय द्वारा अपने दो जर्नलों का भी लोकार्पण कराया गया, जिनमें संकाय के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित “बनारस लॉ जर्नल” तथा “महामना मालवीय स्टूडेंट जर्नल” शामिल हैं। कार्यक्रम में संवाद सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने वक्ताओं से प्रश्न पूछे। इस अवसर पर विधि संकाय के शिक्षकगण के साथ-साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

Sallauddin Ali

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