स्योहारा-बिजनोर-उत्तरप्रदेशबिजनौर-उत्तरप्रदेश

योगी सरकार ने चालू पेराई सीजन के लिए नहीं बढ़ाया गन्ने का मूल्य

WhatsApp Image 2026-04-18 at 09.08.39
previous arrow
next arrow

बिजनौर स्योहारा आईरा न्यूज़ नेटवर्क जिला प्रभारी राजेश सिंघल

स्योहारा ! यूपी सरकार ने चालू पेराई सत्र 2022-23 के लिए गन्ने का मूल्य पिछले पेराई सत्र 2021-22 के मूल्य पर ही स्थिर रखने का फैसला किया है। इससे गन्ना किसानों में भारी निराशा है। गन्ने की खेती में बढ़ती लागत को देखते हुए गन्ने का मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे किसानों को योगी सरकार ने झटका दे दिया है। यूपी सरकार ने चालू पेराई सत्र 2022-23 के लिए गन्ने का मूल्य पिछले पेराई सत्र 2021-22 के मूल्य पर ही स्थिर रखने का फैसला किया है। इससे गन्ना किसानों में भारी निराशा है। योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से छह साल में सिर्फ दो बार गन्ने का भाव बढ़ाया है वह भी सिर्फ 35 रुपये प्रति क्विंटल। पहली बार 10 रुपये प्रति क्विंटल तब बढ़ाया था जब 2017 में भाजपा सत्ता में आई थी। उसके बाद दूसरी बार विधानसभा चुनाव के ठीक पहले 2021-22 के पेराई सत्र के लिए 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी। अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इस बात की संभावना ज्यादा है कि अगले पेराई सत्र में गन्ने का मूल्य बढ़ाकर उसका चुनावी फायदा उठाने की फिर से कोशिश की जाए।

मिलों की कमाई गन्ने के हर भाग से हो रही है, इसके बावजूद दर में नहीं की जा रही है बढ़ोतरी

400 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए गन्ना का मूल्य

भारतीय किसान यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष चौधरी गजेंद्र सिंह टिकैत का कहना है कि महंगाई को देखते हुए मिल और सरकार को इस वर्ष गन्ना का न्यूनतम समर्थन मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बढ़ती हुई महंगाई के बावजूद खाद, बीज और मजदूरी में काफी इजाफा हुआ है। चीनी मिल किसानों से गन्ना कम दाम पर ले रहे है। इसके अलावा खाद, अल्कोहल आदि उत्पाद भी बेचे जाते है। मिलों की कमाई गन्ने के प्रत्येक भाग से हो रही है। सरकार मिल वालों को फायदा पहुंचा रही है।

एक एकड़ में गन्ने की खेती में अधिक लगते पैसे है

भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के ब्लॉक अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों का सरकार शोषण कर रही है। किसान लाचार और परेशान है। सरकार किसानों का हित साधन नहीं कर पा रही है। सरकार द्वारा तय गन्ना मूल्य से किसानों की लागत पूंजी भी ऊपर नहीं हो पाती है। उन्होंने कहा कि गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 400 से 450 रुपये होना चाहिए।

किसानों ने कहा: गन्ना मूल्य संतोषजनक नहीं

गन्ने की घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानो पुष्पराज सिंह आलोक डागर यशपाल सिंह भूपेंद्र सिंह आदि ने असंतोष व्यक्त किया है। किसानों ने कहा है कि गन्ना मूल्य तय करते समय सरकार की ओर से तय समर्थन मूल्य का ध्यान नहीं रखा गया है। राज्य सरकार ने जो उत्तम किस्म के गन्ने के लिए प्रति क्विंटल 350 रुपये मूल्य निर्धारित किया है। गन्ना का सामान्य किस्म के मूल्य की प्रति क्विंटल 340 तय किया गया है। जबकि भाजपा सरकार ने किसानों की आय दुगनी करने का वादा किया था लेकिन इस वर्ष गन्ना समर्थन मूल्य ना बढ़ाकर सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है जबकि किसानों को पूरी उम्मीद थी कि इस बार गन्ना समर्थन मूल्य जरूर बढ़ाया जाएगा
इन फैसलों से सरकार की किसानों की आय दोगुनी करने के दावों की असलियत भी सामने आ गई है।

100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button