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मुख्यमंत्री के मतस्य पालन को मुहँ चिढ़ाता धामपुर शुगर मिल का केमिकलयुक्त ज़हरीला पानी!

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शुगर मिल धामपुर के केमिकल युक्त पानी से हुए लाखो के नुकसान से पीड़ित ने उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बिजनोर को प्रार्थना पत्र सौप की पानी की जांच की माँग!


धामपुर- जिला बिजनौर!
जहाँ एक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज जी के आदेशों के अनुसार जिला मुख्यविकास अधिकारी जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे है वही न्याय न मिलने के कारण मत्स्य पालन करने वालो की उम्मीदें खत्म हो रही है।
धामपुर शुगर मिल की बड़ी लापरवाही से लाखों का हुआ नुकसान।
केमिकल युक्त पानी ग्राम मोहड़ा के तालाब में आने से मछलियों की तड़पकर हुई मौत।
मिल के अधिकारियों ने रातों रात सबूत मिटाने की कोशिश।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित ने
नजदीकी चौकी थाने में एक प्रार्थना पत्र दिया और धामपुर
उपजिलाधिकारी को भी एक प्रार्थना पत्र देकर जांच कर मुआवजे की मांग की थी धामपुर उपजिलाधिकारी ने कारखाना प्रबंधक को फोन कर जो तालाब में केमिकल युक्त जहरीला पानी जाने के कारण मछलियों की मृत्यु हो गई थी जांच कर जल्द से जल्द निस्तारण करने के आदेश दिए थे
मोहड़ा निवासी पट्टा धारक मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से तालाब में मछली पालन कर अपने बच्चों का पालन पोषण कर रहा हूँ वही धामपुर शुगर मिल का केमिकल युक्त जहरीला पानी तालाब में आने से तालाब की सारी मछलियां मर चुकी हैं
इस सम्बन्ध मे पीड़ित ने मिल के उच्च अधिकारियों को अवगत कराते हुए मौके पर जाकर जांच कर नुकसान की भरपाई करने का भी प्रार्थना पत्र दिया था जिसपर मिल के अधिकारी द्वारा अपनी टीम के साथ ग्राम मोहड़ा में जांच के लिए पहुंचे और अधिकारियों ने गांव के लोगों से मछलियों की मरने की जानकारी ली ग्राम वासियों ने बताया कि आपका केमिकल युक्त पानी तालाब में आने से पट्टे धारक की सारी मछलियां मर गई है और तालाब में मछलियां सड़ रही हैं कृपया आप इन सड़ी और मरी मछलियों को तालाब से निकलवा कर कहीं दूर दबा दें ताकि ग्राम में कोई बीमारी ना फ़ैले।
मिल अधिकारियों द्वारा सभी जांच करने के बाद भी पीड़ित मिल के चक्कर लगा लगा कर थक चुका है
उससी क्रम पीड़ित ने उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बिजनोर को प्रार्थना पत्र देकर मिल के केमिकल युक्त पानी की जांच की मांग की है अब देखना ये है कि क्या उच्च अधिकारी द्वारा पीड़ित को न्याय मिलेगा,
क्या उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पानी की जांच कर पीड़ित को न्याय दिलाने मे मदद कर पायेगा या फिर वही नतीजा ढाक के तीन पात !
पीड़ित ने बताया कि उसने मानव अधिकार आयोग दिल्ली को भी पत्र प्रेषित कर न्याय की गुहार लगाई है
अब देखना ये है कि क्या पीड़ित को न्याय मिल पायेगा या मिल अधिकारियों के ऊँचे रसूख़ के चलते एक गरीब पीड़ित की न्याय की आस दम तोड़ देगी।

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