स्योहारा-बिजनोर-उत्तरप्रदेश

मदरसा तजविदुल क़ुरआन आलिया के तीन बच्चो का हुआ हिफ्ज़ मुकम्मल, बने हाफ़िज-ए-क़ुरआन।

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मदरसा तजविदुल क़ुरआन आलिया के तीन बच्चो का हुआ हिफ्ज़ मुकम्मल, बने हाफ़िज-ए-क़ुरआन।

स्योहारा – मोहल्ला कस्बा में सदियों पुराने मदरसे मदरसा तजविदुल क़ुरआन आलिया रयिजिसे मियाँ वाले मदरसे के नाम से भी जाना जाता है में जेर-ए-सदारत मौलाना शरीफ़ अहमद मकसूदपूरी, व जेरे-सरपरस्ती शहर इमाम मौलाना क़ामिल अंसारी, की रहनुमाई में कारी वसीम ने तिलावत-ए-कुरआन व मौलाना मुफ़्ती मोहम्मद राशीद सुर्जनगर ने नात-ए-पाक पढ़ जलसे का आगाज़ किया।

आज के इस प्रोग्राम में हिफ्ज़ मुकम्मल करने वाले बच्चो में मोहम्मद मुज़म्मिल अंसारी नूरपुर, हाफिज मोहम्मद समीर बेरखा, व अब्दुर्रहमान को पगडी बांधी गई व कुरआन के तीस पारे अपने दिल मे महफूज़ किये व हाफ़िज की सनद हासिल की।

आज के इस प्रोगाम में बच्चो के इम्तेहान लेने वाले उस्तादों मे मौलाना शहज़ाद अहमद, कारी रिफाकत ताजपुरी, व मोहम्मद अमज़द अंसारी शामिल रहे।

देहली से तसरीफ लाये मुफ़्ती शादाब ने जलसे में मौजूद लोगों से क़ुरआन की अहमियत बयान करते हुए कहा कि सिर्फ कुरआन ही दुनिया की एक ऐसी क़िताब है जिसके एक भी लफ्ज जेर-जबर व नुक्ते को आज तक कोई बदल नही पाया और ना ही बदल पायेगा हम सभी को अपने सारे मसाइल क़ुरआन की रौशनी में हल करने चाहिए अगर हम ऐसा करते है तो हमारे सामने कोई भी मसाइल टिक नही पायेगा।

आज के इस प्रोग्राम में देहली से आये महमान-ए-ख़ुसूसी मौलाना मुफ़्ती अब्दुस समी रामपुरी, साथ ही देहली से तशरीफ लाये मुफ़्ती शादाब, के अलावा मौलाना मुफ़्ती मोहम्मद राशीद सुर्जनगर, मुफ़्ती मोहम्मद आसिम अंसारी इमाम मस्जिद मियां बुलन शाह, मौलाना इम्तियाज़ कासमी इमाम-जामा-मस्ज़िद स्योहार, कारी मोहम्मद हारून इमाम-ए-मोहमदिया मस्जिद, मौलाना मोहम्मद अकरम इमाम-ए-मस्जिद शेखान, मौलाना शाहिद, कारी नाज़िर,
मौलाना मुफ़्ती सुजाउद्दीन उस्ताद-ए-मदरसा, मौलाना मुफ़्ती नदीम अहमद, मौलाना मुफ़्ती फुरकान, कारी मोहम्मद अहमद, कारी वसीम अहमद, सदर मदरसा आलिया मास्टर मोहम्मद सरफराज़, मास्टर मोहम्मद नफ़ीस फरीदी, मास्टर इक्तदार, मास्टर सरताज़ अहमद, मास्टर नफ़ीस अहमद, मास्टर अब्दुर्रहमान, मौलाना मोहम्मद असलम, कारी तहसीन अफज़ल, मौलाना मोहम्मद कासिम, हाफिज मोहम्मद माज़, हाफ़िज मोहम्मद अहमद अंसारी, निसार अंसारी, के अलावा सेकड़ो मोहल्लेवासी जलसे में मौजूद रहे।

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