बीएचयू में ‘हैंड्स ऑन क्ले’ कार्यशाला ने रचनात्मक कलाओं की छात्र कल्याण में भूमिका को रेखांकित किया

चार दिवसीय अनुभवात्मक कार्यक्रम में 220 छात्रों ने भाग लिया; कला, माइंडफुलनेस और भावनात्मक संतुलन का अनूठा संगम
कल्याणकारी सेवा प्रकोष्ठ, काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित चार दिवसीय अनुभवात्मक क्ले मॉडलिंग कार्यशाला “हैंड्स ऑन क्ले – क्राफ्टिंग काम, क्रिएटिविटी एंड कनेक्शन” का सफल समापन 6 फरवरी 2026 को हुआ। यह पहल प्रकोष्ठ के उन सतत प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य रचनात्मक कलाओं, माइंडफुलनेस और भावनात्मक कल्याण को छात्र जीवन में सार्थक रूप से एकीकृत करना है।
कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को मिट्टी जैसे प्राकृतिक माध्यम के साथ जुड़ने, अपनी गति धीमी करने, आंतरिक लय से पुनः जुड़ने और स्पर्श आधारित रचनात्मकता के माध्यम से भावनाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करना था। प्राकृतिक सामग्री के साथ काम करने से मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा मिलता है—इसी विचार पर आधारित यह कार्यक्रम छात्रों को शैक्षणिक दबाव और डिजिटल थकान से एक सुखद विराम देता है।
चार दिनों के दौरान प्रतिभागियों ने बेसिक स्कल्प्टिंग तकनीकें, माइंडफुल क्ले हैंडलिंग, सामूहिक कला निर्माण, तथा निर्देशित चिंतन सत्रों में भाग लिया। इन गतिविधियों ने छात्रों में धैर्य, एकाग्रता, उपस्थिति और सामुदायिक जुड़ाव की भावना को प्रोत्साहित किया। पूरे कार्यक्रम का वातावरण सौम्य, सहयोगी और अत्यंत संलग्नकारी रहा, जिससे छात्रों को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त होने और कला के चिकित्सीय प्रभाव को अनुभव करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम को छात्रों से अत्यंत उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया मिली और 220 छात्रों ने विभिन्न संकायों एवं संस्थानों से भागीदारी की। प्रतिभागियों ने इसे शांतिदायक, आत्मविश्वास वर्धक और इंद्रियों से पुनः जुड़ने वाला अनुभव बताया।
छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि रचनात्मक और संवेदी आधारित कल्याण कार्यक्रम आज के शैक्षणिक वातावरण में अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे अनुभवात्मक कार्यक्रम छात्रों की भावनात्मक दृढ़ता, एकाग्रता और स्वस्थ परिसर संस्कृति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कल्याणकारी सेवा प्रकोष्ठ को कला आधारित और माइंडफुलनेस उन्मुख कार्यक्रमों को और विस्तार देने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यशाला का संचालन कल्याणकारी सेवा प्रकोष्ठ के छात्र परामर्शदाता नित्यानन्द तिवारी द्वारा किया गया, जिन्होंने सत्रों का मार्गदर्शन किया और पूरे कार्यक्रम में सहयोगी एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया। उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला न केवल रचनात्मकता को पोषित करती है, बल्कि आत्मविश्वास, एकाग्रता और शैक्षणिक उत्कृष्टता को भी बढ़ावा देती है।
प्रशिक्षण सत्रों का संचालन एसआर फेलो – सुश्री चंदन सिंह, सुश्री प्रीति राव, श्री अविनाश पुष्पराज एवं सुश्री खुशी राय द्वारा किया गया:
इन प्रशिक्षकों की कलात्मक विशेषज्ञता और धैर्यपूर्ण मार्गदर्शन ने छात्रों को मिट्टी को अभिव्यक्ति, स्थिरता और भावनात्मक विमोचन के माध्यम के रूप में समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी उपस्थिति ने कार्यशाला को शैक्षणिक और चिकित्सीय—दोनों रूपों में समृद्ध बनाया।
प्रकोष्ठ विश्वविद्यालय परिसर में कल्याण, रचनात्मकता, भावनात्मक दृढ़ता और करुणामय जुड़ाव की संस्कृति को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे कार्यक्रम बीएचयू की समग्र छात्र विकास और पोषक शैक्षणिक वातावरण की दृष्टि को और मजबूत करते हैं।


















