प्राचीन भारतीय मसाला व्यापार पर व्याख्यान,वैश्विक प्रभावों पर हुआ विस्तृत विमर्श

भारत का मसाला व्यापार कैसे बना विश्व अर्थव्यवस्था का आधार –डॉ.वर्मा ||
ऑनलाइन व्याख्यान में उजागर हुई भारत की व्यापारिक समृद्ध विरासत ||
मसालों से दुनिया तक प्राचीन भारत के व्यापार का वैश्विक असर ||
भारतीय व्यापार ने जोड़े विश्व के सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते –विशेषज्ञ ||
प्राचीन व्यापार मार्गों से उपनिवेशवाद तक व्याख्यान में ऐतिहासिक विश्लेषण ||
भारतीय मसालों की खुशबू से बदली दुनिया की अर्थव्यवस्था और संस्कृति
वाराणसी :- वाराणसी इंस्टीट्यूट ऑफ हिस्ट्री द्वारा “”Early Indian Spice Trade and Its Global Impact (प्रारंभिक भारतीय मसाला व्यापार और उसका वैश्विक प्रभाव)” विषय पर एक ऑनलाइन व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता डॉ.विकास कुमार वर्मा,एसोसिएट प्रोफेसर,इतिहास विभाग,रामजस कॉलेज,दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने विचार प्रस्तुत किए | डॉ.वर्मा ने अपने व्याख्यान में प्राचीन भारत के समृद्ध मसाला व्यापार के ऐतिहासिक स्रोतों,मौसमी परिवर्तनों के साथ व्यापारिक मार्गों और मसाला उत्पादन क्षेत्रों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत प्राचीन काल में वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र था उन्होंने विशेष रूप से मसाला व्यापार,वस्त्र व्यापार और धातु विनिमय की चर्चा करते हुए बताया कि भारतीय वस्तुएँ रोम,मिस्र, चीन और अरब देशों तक निर्यात की जाती थीं जिसका वर्णन विदेशी यात्रियों द्वारा किया गया है उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि समुद्री और स्थल मार्गों के माध्यम से भारत का संपर्क विभिन्न सभ्यताओं से स्थापित हुआ जिससे न केवल आर्थिक विकास हुआ बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिला |
भारतीय ज्ञान,विज्ञान,कला और परंपराओं का प्रभाव अन्य देशों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है | आज कई बीमारियों के संक्रमण को रोकने हेतु आयुर्वेद के क्षेत्र में मसालों का उपयोग प्रासंगिक हो गया है | डॉ.वर्मा ने यह भी समझाया कि भारतीय व्यापार ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसी के परिणाम स्वरूप नए व्यापार मार्गों की खोज और उपनिवेशवाद की शुरुआत हुई उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कैसे भारतीय मसालों ने यूरोप,मध्य एशिया और अन्य क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था,खान -पान और सांस्कृतिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया |
इस संस्थान की संस्थापक निदेशक एमेरिटस प्रोफेसर अरूणा सिन्हा ने मुख्य वक्ता का स्वागत एवं व्याख्यान विषय को प्रतिस्थापित करते हुए कहा कि भारतीय व्यापारियों ने अरब,रोमन और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध स्थापित किए थे | भारतीय व्यापार ने केवल आर्थिक ही नहीं,बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया | भारतीय परंपराएँ, खान-पान और ज्ञान प्रणालियाँ अन्य सभ्यताओं को प्रभावित करती रहीं | अपने संबोधन में प्रो.सिन्हा ने वर्तमान पीढ़ी को इस समृद्ध विरासत को समझने और उससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया |
इस कार्यक्रम का संचालन डॉ.कुलदीप कुमार मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन चांदनी यादव ने किया | इस कार्यक्रम में डॉ. जयलक्ष्मी कौल,डॉ.बैजू कुमार सहित विभिन्न संस्थानों से लगभग 100 से अधिक विद्यार्थियों,शोधार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस कार्यक्रम को सफल एवं सार्थक बनाया ||


















