प्रधान पद पर अफसाना बेगम को मिल रही लोकप्रियता से विरोधियों में बौखलाहट

काशीपुर /उत्तराखंड (रिज़वान अहसन ),,,,काशीपुर ग्राम गुलड़िया में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव एक जश्न के रूप में देखा जा रहा है यहां प्रधान पद के उम्मीदवारों में अपनी अपनी की बढ़त के लिए एक गजब का उत्साह देखा जा सकता है।
वैसे तो यहां प्रधान पद के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में है परंतु इनमें अफसाना पत्नी इंतखाब आलम मतदाताओं के बीच अधिक लोकप्रिय दिखाई दे रही हैं आपको बता दें कि यह महिला आरक्षित सीट है और यहां के 1995 वोटर किसी भी उम्मीदवार का भाग्य तय करेंगे इंटर पास अफसाना जिनका चुनाव निशान अनाज की बाली है।यहां महिलाओं में खासी पकड़ रखती हैं और उनके पति इंतखाब आलम भी ग्रामीण इलाकों में सेवा कार्यों के लिए जाने जाते हैं पत्रकारों से रूबरू होकर इंतखाब आलम ने कहा यह गांव मुस्लिम आबादी वाला गांव है तथा विकास इस गांव से हमेशा कोसों दूर रहा है यहां न शौचालय की व्यवस्था है ना ही नालियों का निर्माण हुआ है और सड़कों की हालत तो ऐसी है जिस पर पैदल चलना भी दुबर हो जाता है इंतखाब आलम ने कहा कि यदि यहां की जनता उन पर भरोसा करके उनकी पत्नी को प्रधान बनाते हैं तो उनका प्रथम लक्ष्य यहां नालियों का चौड़ीकरण करके निर्माण कराया जाएगा तथा गांव की प्रत्येक सड़क को मुख्य सड़क तक पक्का किया जाएगा शिक्षा स्वास्थ्य एवं रोजगार के मुद्दों पर बड़ी गंभीरता के साथ कार्य किया जाएगा सरकारी योजनाओं का लाभ जो अब तक कोई भी प्रतिनिधि ग्रामीण वासियों को नहीं दिला पाए हैं। उसका लाभ जन जन तक पहुंचेगी इंतखाब आलम ने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है इस बार जनता अनाज की बाली पर ही मोहर लगाएगी और उनकी पत्नी अफसाना को प्रधान पद पर सुशोभित करेंगे। वहीं मीडिया सर्वे में जब ग्रामीण क्षेत्र का दौरा किया गया तो ग्राम वासियों ने बताया की पूर्व के प्रधान और उनके सहयोगी पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिप्त रहे तथा इस गांव के विकास के लिए उनका कोई योगदान नहीं है आज भी यहां के लोग विधवा विकलांग वृद्धावस्था पेंशन से वंचित है वहीं पात्र लोगों को आवासीय कॉलोनी भी आवंटित नहीं की गई पिछले दो दशक से यहां किसी सड़क का निर्माण नहीं हुआ यदि ग्राम वासियों ने निवर्तमान प्रधान के सहयोगी जो गांव का एक रसूखदार व्यक्ति है से विकास कार्यों के बाबत पूछा तो उन्होंने कहा की सांसद एवं विधायक निधि से उन्हें कोई सहयोग प्राप्त नहीं होता है तथा मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण यह राजनीतिक रूप से उपेक्षा का शिकार है आम जनमानस का यह भी कहना है की ग्राम गुलरिया को अभी तक ऐसा कोई भी प्रतिनिधि नहीं मिला जो यहां का संपूर्ण विकास कर सके कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर यह भी कहा कि निवर्तमान प्रधान के एक सहयोगी जो की उनका सारा कार्य देखते थे पूर्णता भ्रष्टाचार में लिप्त थे और सरकारी धन का भी उन्होंने दुरुपयोग कियाऔर केवल और केवल अपना ही विकास करते चला गया।जिसके कारण यह गांव विकास से दूर चला गया मीडिया सर्वे के अनुसार श्रीमती अफसाना पत्नी इंतखाब आलम के मुकाबले में अधिक शिक्षित एवं कर्मद दिखाई दे रही हैं और मतदाताओं का रुझान भी अफसाना बेगम खींचने में कामयाब हो रही है मतदान 28 तारीख को है अब देखना होगा किसकी होगी शेह और किसकी होगी मात।


















