काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में एग्रो-इंडस्ट्री, अकादमिया एवं किसान सम्मेलन 2026 का सफलता पूर्वक समापन

वाराणसी :- सम्मेलन के दूसरे दिन 19 अप्रैल रविवार को डॉक्टर पहले सत्र के पहले पैनल चर्चा में डॉ.पी.के.चक्रवर्ती,पूर्व सहायक महानिदेशक,पादप संरक्षण, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली ने “फसलों का समूहीकरण और कीटनाशकों का सीमित उपयोग” पर अपना विस्तार पूर्वक चर्चा किया उन्होंने बताया कि भारत में 500 से अधिक फसलें उगाई जाती हैं लेकिन केवल सीमित फसलों के लिए ही कीटनाशक पंजीकृत हैं जिससे किसानों को कई बार ऑफ लेबल उपयोग करना पड़ता है उन्होंने स्पष्ट किया कि फसल समूहकरण के अंतर्गत समान प्रकृति,समान कीट रोग एवं समान अवशेष व्यवहार वाली फसलों को एक समूह में रखा जाता है यदि उस समूह की एक प्रतिनिधि फसल पर कीटनाशक का परीक्षण सफल हो जाता है तो उसी समूह की अन्य फसलों पर भी उसका उपयोग संभव हो जाता है |
इस प्रणाली से पंजीकरण प्रक्रिया सरल होती है लागत कम होती है और विशेष रूप से मसाला जैसी लघु फसलों के लिए भी सुरक्षित कीटनाशक उपलब्ध हो सकते हैं साथ ही उन्होंने अधिकतम अवशेष सीमा (MRL) के सामंजस्य पर भी बल दिया जिससे निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है उन्होंने बताया कि यूनाइटेड स्टेट्स जैसे देशों में यह प्रणाली पहले से सफलतापूर्वक लागू है |
डॉ.एच.बी.सिंह पूर्व अध्यक्ष उत्तर प्रदेश राज्य पर्यावरण मूल्यांकन समिति, लखनऊ ने “कृषि स्थिरता के लिए जैव- कीटनाशक नियमों में नया विनियमन” पर अपना विस्तार पूर्वक चर्चा किया | भारत में बायोपेस्टीसाइड्स के नवीनतम नियमों पर प्रकाश डाला उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 970 माइक्रोबियल बायोपेस्टीसाइड्स पंजीकृत हैं तथा देश में लगभग 8000 मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है उन्होंने इसके पंजीकरण प्रक्रिया एवं भविष्य की संभावनाओं को भी विस्तार से प्रस्तुत किया | उन्होंने अपने चर्चा में इस बात पर किसानो का ध्यान किया कि किसानो को ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) जो कि एक बेहद फायदेमंद जैविक फफूंदनाशक (Bio-fungicide) है जो मिट्टी और बीज जनित रोगों जैसे उकठा (Wilt) और तना गलन (Root rot) को नियंत्रित करता है यह मित्र कवक फसलों की जड़ों के चारों ओर सुरक्षा कवच बनाकर उन्हें हानिकारक फफूंद से बचाता है जिससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और उपज बढ़ती है यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित है उन्होंने अपने उद्बोधन में जोर देकर कहा कि हो सकता है कि इसका फायदा कही पर ज्यादा व कही पर काम हो सकता है इसका मुख्य कारण मृदा में जैविक तत्व की उपलब्धता पर निर्भर करता है | दूसरे पैनल चर्चा में प्रो.जे.पी.लाल,प्रो.अमिताभ रक्षित,प्रो.आर.के.दुअरी,प्रो.अमित कुमार, डॉ.सुनील कुमार (IRRI-SARC), डॉ. प्रगति श्रीवास्तव तथा विपिन कुमार, शैलेन्द्र रघुवंशी,धनजय ओझा (सीए) प्रतिभागियों ने “उन्नत प्रौद्योगिकी और स्मार्ट खेती” पर चर्चा में भाग लिया |
विषय विशेषज्ञों ने बताया कि किस प्रकार खेती में प्रिसिशन खेती,कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन आधारित फसल निगरानी और कृषि मशीनरी व यंत्रों का उपयोग करके खेती से अधिक से अधिक लाभ ले सकते है | यह सत्र तकनीकी नवाचारों को किसानों तक पहुँचाने की दिशा में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ | समापन समारोह के मुख्य अतिधि डॉ.के.के सिंह पूर्व कुलपति SBPUAT, मेरठ ने कृषि मशीनरी कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना पर विशेष बल दिया जो छोटे एवं सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण सुलभ कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा | इससे न केवल लागत में कमी आएगी बल्कि कृषि कार्यों की दक्षता और उत्पादकता भी बढ़ेगी | इसके साथ ही प्रसंस्करण उद्योग, महिला किसानों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया |
महिला किसानों को आधुनिक तकनीकों, प्रसंस्करण विधियों एवं विपणन कौशल का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है | यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है इसके अतिरिक्त,किसानों और छात्रों के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों के महत्व को उजागर किया गया जो उन्हें आधुनिक कृषि एवं उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम बनाएंगे |
समापन समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ.यू.एस.गौतम,पूर्व उप महानिदेशक (कृषि विस्तार),भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली ने बताया की महिला किसानों की मौजूदगी कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव दर्शाती है | उत्पाद विकास के लिए छात्रों को उद्योग जगत में शामिल करना,एफपीओ के उत्थान और कौशल विकास,विपणन (मार्केटिंग) कौशल पर विशेष जोर दिया | उपभोक्ताओं का व्यवहार बदल रहा है जिसके आधार पर मांग भी बदल रही है इसलिए हमें बदली हुई मांग के अनुसार योजना बनाने की आवश्यकता है यदि हमें थ्री ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य प्राप्त करना है तो हमें किसानों की आय में कई गुना वृद्धि करनी होगी |
समापन समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ.एच.बी.सिंह पूर्व अध्यक्ष उत्तर प्रदेश राज्य पर्यावरण मूल्यांकन समिति, लखनऊ ने किसानो के उत्पादों का भौगोलिक संकेत टैग की आवश्यकता पर जोर दिया | समापन समारोह के अध्यक्ष प्रो.यू.पी.सिंह निदेशक कृषि विज्ञान संस्थान काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने बताया कि कृषि की मुख्य समस्याएं मानसून,मानव संसाधन,बाज़ार है साथ ही कृषि उत्थान के लिए संरक्षित खेती, आइएफएस,व्यावसायिक उद्यमिता विकास, स्वस्थ खाद्य उत्पादन और हर्बल फ़ॉर्मूलेशन का विकास आदि मुख्य विकल्प के रूप में साबित हो रहे हैं | सम्मेलन के सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन में आयोजन समिति के सदस्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही | आयोजन सचिव प्रो.मनोज कुमार सिंह ने पूरे कार्यक्रम के समन्वय,रूपरेखा निर्धारण एवं विभिन्न सत्रों के प्रभावी संचालन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई जिससे कार्यक्रम समयबद्ध एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सका | कोषाध्यक्ष डॉ.एस.पी.सिंह ने वित्तीय प्रबंधन, संसाधनों के समुचित उपयोग एवं व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया | तकनीकी सत्रों के संचालन एवं विषयगत दिशा प्रदान करने में सत्र संयोजक प्रो.अमिताव रक्षित की भूमिका उल्लेखनीय रही जिन्होंने विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के बीच सार्थक संवाद सुनिश्चित किया |
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ.अफ़ज़ल एवं डॉ.शिखा द्वारा अत्यंत प्रभावशाली, सुसंगठित एवं आकर्षक ढंग से किया गया जिससे पूरे आयोजन में ऊर्जा एवं प्रवाह बना रहा | वहीं प्रेस एवं मीडिया समन्वय की जिम्मेदारी डॉ.ओ.पी.सिंह,डॉ.सर्वेश कुमार,डॉ.आशीष लटारे एवं डॉ.तरुन द्वारा निभाई गई जिन्होंने कार्यक्रम की गतिविधियों का प्रभावी प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करते हुए इसे व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुभदीप रॉय ने किया ||


















