काशी में भरत के भ्रातृ प्रेम की गूंज,राम महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब

भरत के त्याग और समर्पण पर भावुक हुआ काशी,रामतारक आश्रम में भव्य अनुष्ठान |
भाई हो तो भरत जैसा राम महोत्सव में आदर्श प्रेम की अद्भुत मिसाल |
पादुका राज की कथा से गूंजा काशी,भरत के समर्पण ने छुआ हर दिल ||
राम महोत्सव में भरत बने केंद्र,यज्ञ-हवन में गूंजा भ्रातृ प्रेम का संदेश ||
वाराणसी :- काशी के मानसरोवर तीर्थ में मनाये जा रहे श्री राम साम्राज्य पट्टाभिषेक महोत्सव में शनिवार का दिन भाई भरत के भ्रातृ प्रेम के नाम समर्पित रहा | काशी के केदारखंड स्थित श्री रामतारक आन्ध्रा आश्रम के विशाल प्रांगण में चल रहे महोत्सव के तीसरे दिन देश भर से आये वाल्मिकि रामायण के मर्मज्ञों ने अयोध्या कांड के पारायण को विश्राम दिया | यज्ञ के मुख्य आचार्य उलिमीरी सोमायाजुलू भाई भरत के भ्रातृ प्रेम की चर्चा करते हुए अन्य वैदिक विदनों के साथ उनके नाम से विशेष आहुतियां समर्पित की उन्होंने कहा कि भाई भरत ने अग्रज के प्रति स्नेह, आदर व समर्पण का जो उदाहरण प्रस्तुत किया वह विश्व में भ्राता प्रेम का प्रतिमान है उन्होंने बताया कि किस तरह से वन से वापस अयोध्या लौट रहे भरत ने अग्रज की आज्ञा स्वीकार की और मस्तक पर उनकी चरण पादुका धारण कर अयोध्या व वापस हुए |
बताया कि अयोध्या वापसी से पहले श्रीराम प्रभु ने भरत को राजनीति के जो मर्म समझाये तो उन्होंने अपने जीवन में उतार लिया और उसी के अनुरुप पादुका का अभिषेक कर चौदह वर्षों तक रामराज चलाया | यह समर्पण अतुलनीय है यदि आज का समाज इसी के अनुरूप आचरण करें तो परिवारों में भाई- भाई के बीच रार ही पैदा नहीं होगी | उत्सव के यज्ञ मंडप में आज श्री वाल्मिकि रामायण के सभी प्रमुख पात्रों के नाम आहुतियां प्रदान की गई | आज आश्रम में राम पादुका को लेकर भक्तों साथ पूजा किया गया |
यजमान के रूप में हवन पीठिका पर बैठे वीवी सुंदर शास्त्री ने आचार्यों के निर्देशन में सभी अनुष्ठान पूरे किये संयोजन था आश्रम के प्रबंधक वीवी सीताराम का |
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्याम शास्त्री,बुध शर्मा,विरूपाक्ष मूर्ति,अनुपम भट्टाचार्य उमा धारणिया शामिल रहीं ||


















