सूखा, उजाड़, वीरान और बेबस जीवन के अंतिम छोर पर खड़ा

प्रथम दृष्टया इस पेड़ को देखकर आप यही कयास लगा सकते हैं कि यह कब न कट जाए, किसी कुल्हाड़ी की बेंट बने, फर्नीचर में नजर आए या फिर किसी चूल्हे-भट्टी में जलता हुआ दिखाई दे।
मगर रुकिए, किसी का बाहरी रूप उसके गुणधर्म का परिचायक नहीं होता। इस पेड़ के साथ ऐसा कुछ भी नहीं है। न तो यह सूखा है, न ही उजाड़, बल्कि अमृत-सा फल देने के बाद यह इस स्थिति में है। जानते हैं, यह आंवले का पेड़ है। फल समाप्त होने के बाद इसकी पत्तियां झड़ गई हैं, इसलिए यह सूखा और वीरान दिखाई दे रहा है, जबकि सच यह है कि यह फिर नए सिरे से हरियाने और लोगों को अमृततुल्य फल देने के लिए स्वयं को तैयार कर रहा है।
इसलिए किसी की वर्तमान दीन-हीन स्थिति देखकर उससे दूर मत भागिए, उससे कन्नी मत काटिए, उसका मजाक मत उड़ाइए। हो सकता है प्रकृति या वह स्वयं उसे फिर से बेहतर बना रहा हो, उसे और समृद्ध तथा मजबूत कर रहा हो, बस उसका बाहरी आवरण आपको बेजान, बेकार और सूखा प्रतीत हो रहा हो। संभव है वह पहले से भी बेहतर होकर लौटने को आतुर हो।
सनद रहे अंधेरा भोर का भी उतना ही काला होता है जितना आधी रात का, लेकिन भोर का अंधेरा एक नई सुबह लेकर आता है। जो माहौल अभी काला दिखाई देता है, वही अचानक सुरमई रोशनी से भर उठता है।
इसलिए कभी बुरे समय से निराश मत होइए, बल्कि इस दौर में अपने और पराए को पहचानिए। संभव है आपका बुरा वक्त बीत चुका हो और जिसे आप अभी बुरा समय समझ रहे हों, वह दरअसल भोर का अंधेरा हो।
नई सुबह की रोशनी का इंतजार कीजिए, एक चमकदार सबेरा आपकी जिंदगी में अभी बाकी है। धैर्य रखिए, यह वक्त है, बदलेगा जरूर।
























