बीएचयू में जापानी छात्रों ने लिया भारतीय दर्शन और संस्कृति का अनुभव

वाराणसी: 25.02.2026: जापान के टोयो विश्वविद्यालय के 21 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की अपनी शैक्षणिक यात्रा का समापन भारतीय संस्कृति, दर्शन और ज्ञान परम्पराओं के समृद्ध अनुभवों के साथ किया। 16 फरवरी से वाराणसी प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने संस्कृत, हिन्दी, तबला, कथक और योग सहित विविध विषयों पर गहन अध्ययन एवं प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह यात्रा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग तथा टोयो विश्वविद्यालय, जापान के मध्य हुए समझौता ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित किया गया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व टोयो विश्वविद्यालय के डॉ. केंजी ताकाहाशी ने किया।
बुधवार को प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी से उनके आधिकारिक आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्ययन तथा वाराणसी एवं सारनाथ के पवित्र एवं सांस्कृतिक स्थलों के भ्रमण का अनुभव साझा किए। अकरी शिमिज़ु ने संस्कृत श्लोकों का पाठ करते हुए “अतिथि देवो भव” की भारतीय भावना का उल्लेख किया तथा विश्वविद्यालय की आत्मीय परंपरा के प्रति आभार व्यक्त किया।
संवाद के दौरान कुलपति ने विद्यार्थियों से पूछा कि भविष्य में कितने छात्र पुनः बीएचयू और वाराणसी आना चाहेंगे। सभी विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक पुनः आगमन की इच्छा व्यक्त की। प्रो. चतुर्वेदी ने ऐसे अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल देते हुए दीर्घकालिक तथा ऑनलाइन शैक्षणिक कार्यक्रमों के विस्तार का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के मध्य शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक आदान-प्रदान को सशक्त करने वाली पहलें दोनों देशों के पारस्परिक समझ और साझा मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अंतरराष्ट्रीय केंद्र के प्रो. राजेश सिंह ने प्रतिनिधिमंडल का औपचारिक परिचय प्रस्तुत किया। पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार यादव ने विद्यार्थियों के लिए आयोजित शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्षेत्रीय गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल, प्रो. प्रीति दुबे, डॉ. बुद्ध घोष तथा डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह भी उपस्थित रहे।
यह यात्रा दोनों विश्वविद्यालयों के मध्य शैक्षणिक सहयोग और सांस्कृतिक संवाद को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा बीएचयू की अंतरराष्ट्रीयकरण और वैश्विक शैक्षणिक साझेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
























