फर्जी बिल/दस्तावेज के जरिए भुगतान का आरोप,ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर गंभीर सवाल-राज्य मानवाधिकार आयोग में केस दर्ज
“एक ही कागज से लाखों का खेल! बिजनौर की पंचायत में ‘डिजिटल घोटाले’ का खुलासा—मामला मानवाधिकार आयोग पहुँचा”
फर्जी बिल/दस्तावेज के जरिए भुगतान का आरोप, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर गंभीर सवाल; राज्य मानवाधिकार आयोग में केस दर्ज
आईरा न्यूज़ नेटवर्क |
बिजनौर/स्योहारा:
जनपद बिजनौर के ब्लॉक बुढ़नपुर की ग्राम पंचायत मैवला माफी में कथित वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें आरोप है कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से फर्जी/अपूर्ण दस्तावेज अपलोड कर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
यह मामला अब और गंभीर हो गया है क्योंकि इसे लेकर उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग में आधिकारिक शिकायत दर्ज हो चुकी है, जिसे आयोग ने रजिस्टर कर केस नंबर 5566/24/17/2026 आवंटित किया है।
क्या है पूरा मामला..?

मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार:
एक ही दस्तावेज के आधार पर कई भुगतान किए जाने के आरोप
कई भुगतानों में बिल/वाउचर और माप पुस्तिका (MB) का अभाव
विकास कार्यों के नाम पर धन निकासी, लेकिन जमीनी सत्यापन संदिग्ध
यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
शिकायतकर्ता के अनुसार,
यदि विकास कार्य वास्तविक रूप से नहीं हुए, तो ग्रामीणों को उनके
विकास के अधिकार
पारदर्शिता के अधिकार
समान अवसर के अधिकार
से वंचित किया गया है — जो सीधे तौर पर मानवाधिकार हनन की श्रेणी में आता है।
मानवाधिकार आयोग में
शिकायत दर्ज कर
डायरी नंबर जारी: 2273/IN/2026
केस नंबर आवंटित: 5566/24/17/2026
पर दर्ज कर दिया है
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आरोप सही साबित होते हैं तो:
विभागीय जांच
एफआईआर दर्ज
संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों पर कार्रवाई
वित्तीय रिकवरी
जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
अब बड़ा सवाल ये है कि
क्या यह सिर्फ एक पंचायत का मामला है
या
“ई-ग्राम स्वराज सिस्टम” में कोई बड़ा पैटर्न छिपा है?
आईरा न्यूज़ नेटवर्क के विश्लेषण के अनुसार
यह मामला केवल एक स्थानीय अनियमितता नहीं, बल्कि
डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम की विश्वसनीयता और जमीनी हकीकत के बीच गैप को उजागर करता है।
अब पूरा मामला जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स एवं शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों/प्राधिकरणों द्वारा की गई जांच के पश्चात ही निर्धारित होगा।



























