पंकज गुगलानी नहीं रहे…लेकिन उनकी यादें हर सांस में रहेंगी-वो चेहरा जो दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने की वजह हुआ करता था।

पंकज गुगलानी नहीं रहे…
लेकिन उनकी यादें हर सांस में रहेंगी।
धामपुर – 27 जून दोपहर 1:30 बजे वो लम्हा आया, जिसने हमारे बीच से एक ऐसा चेहरा छीन लिया… जो हर किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने की वजह हुआ करता था।
पंकज गुगलानी… एक नाम नहीं, एक एहसास थे। एक ऐसा दोस्त, जो सिर्फ दोस्ती निभाता नहीं था… उसमें जीता था।
वो इंसान, जिसने कभी अपनी खुशी, अपना दर्द, अपने सपने… खुद के लिए नहीं जिए। हमेशा औरों की तकलीफ को अपना समझा, हर किसी के लिए वक्त निकाला, हर दर्द को बांट लिया… और जब भी मिला, सिर्फ प्यार दिया।
मुझे आज भी याद है… कुछ महीने पहले जब मैं धामपुर गया था, तो स्टेशन पर वो खुद मुझे लेने आया था। गर्मजोशी से गले लगते हुए बोला,
“यार तू आया है… अब सब अच्छा लगेगा।”
फिर अपने होटल लेकर गया… और खुद अपने हाथों से अदरक वाली चाय बनाई। बैठकर घंटों बातें कीं — पुराने किस्से, हँसी-ठहाके, और नए सपने।
उस दिन उसकी आंखों में एक चमक थी —
“अब सब ठीक हो गया है,”
वो बोला था,
“फैमिली अब धामपुर शिफ्ट हो रही है। अब बच्चों के लिए जीना है… अब उनके लिए कुछ बनना है।”
फिर जेब से मोबाइल निकाला, बेटे की फोटो दिखाई —
“देख तेरा भतीजा, कैसा स्मार्ट है ना?”
और तुरंत उसे फोन भी मिला दिया।
उसे सुनकर उस दिन दिल खुश हो गया था… और आज उसी दिल में खालीपन है, सन्नाटा है।
पंकज भाई,
आप चले गए, मगर आपकी मुस्कान अब भी साथ है, आपकी बातें अब भी कानों में गूंजती हैं, आपकी चाय की खुशबू आज भी याद आती है… और सबसे बढ़कर,
आप जैसा इंसान इस दुनिया में मिलना अब मुश्किल है।
आपका जाना सिर्फ एक इंसान का जाना नहीं,
एक रिश्ते का टूट जाना है,
एक दोस्ती का बिखर जाना है,
एक अपनापन हमेशा के लिए छिन जाना है।
आपकी आत्मा को शांति मिले।
आप हम सबकी दुआओं में, यादों में, और हर धड़कन में ज़िंदा रहेंगे।
ॐ शांति। 🙏























