ग्राम पंचायत मोहम्मद कुली रसूलपुर का हाल देखकर किसी ने मज़ाक में कह दिया-“यहां विकास ऐसे भागा है जैसे बकरी शेर को देखकर भागती है!”
आईरा न्यूज़ नेटवर्क – खबर वही जो हो सही
अफसरों ने कहा कि रिपोर्ट जाएगी ऊपर। ग्रामीणों ने जवाब दिया – “ऊपर जाएगी तो क्या होगा? ऊपर भी वही कुर्सियां हैं, जिन पर बैठकर सालों से ये ‘विकास का कॉमेडी शो’ लिखा जा रहा है।”
“रसूलपुर पंचायत में टूटा विकास – ईंटें गिरीं, लेकिन कुर्सियाँ अडिग!”
स्योहारा। ग्राम पंचायत मोहम्मद कुली रसूलपुर में विकास कार्य ऐसे ढहते मिले जैसे शादी के मंडप में बिना बाँस के तम्बू! ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन देकर प्रधान और अधिकारियों पर वही आरोप लगाया, जो हर गांव में लगाया जाता है – “पैसा पूरा खाया, काम आधा कराया।”

जिला प्रोवेशन अधिकारी वीरेंद्र यादव और अवर अभियंता संजीव कुमार जब जांच के लिए पहुंचे तो आरआरसी सेंटर और नाले देखकर चौंक गए। हालत ऐसी कि लग रहा था मानो ‘निर्माण’ नहीं, बच्चों की माटी की हवेली हो!
निरीक्षण टीम पहुंची तो प्रधान सुनीता देवी और पंचायत सचिव भी मौके पर थे। लेकिन जवाब वही पुराना ‘तोता-रटंत’:
👉 “काम नियमों के मुताबिक हुआ है।”
गांव वाले ठहाका लगाकर बोले – “सही कहा, नियम तो यही है – सीमेंट बचाओ, बालू बढ़ाओ, और जनता को उल्लू बनाओ!”
ग्रामीण बोले – “मानक से काम हुआ होता तो आज ये नाले पानी निकालते, न कि खुद मलबा बन जाते।” गांव के एक बुजुर्ग ने तंज कसा – “ये काम इतने घटिया हैं कि बारिश भी इन्हें छूने से डरती होगी।”
👉 अफसरों ने रिपोर्ट भेजने की बात कही, पर गांव वालों को पहले से अंदाजा है – रिपोर्ट फाइलों में सोएगी, और टूटी दीवारें अगली जांच तक ग्रामीणों का मज़ाक उड़ाती रहेंगी।
ग्रामीणों का गुस्सा देखते ही बन रहा था। किसी ने ताना मारा – “काम ऐसा हुआ कि बच्चे भी अपने खिलौने वाले ईंट-पत्थरों से इससे बेहतर बना लें।”






