काशीपुर-उत्तराखण्ड़

टचवुड स्कूल में भव्य आयोजित हुआ वार्षिकोत्सव “रंगों का अभिमान

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काशीपुर / उत्तराखंड (नसरीन खान निशा ),,,,,जब शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक चेतना जुड़ जाए, तब स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि समाज निर्माण की प्रयोगशाला बन जाता है। कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला ग्राम बैलजूड़ी स्थित द टचवुड स्कूल में, जहां वार्षिक महोत्सव “रंगों का अभिमान” का भव्य और भावनात्मक आयोजन किया गया।


इस अवसर पर स्कूल परिसर रंग, संस्कृति और संदेशों से सराबोर नजर आया। छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज को सोचने पर मजबूर करने वाले गंभीर विषयों को भी मंच पर जीवंत किया। कार्यक्रमों के जरिए भारत की बहु-सांस्कृतिक विविधता, बदलते पारिवारिक रिश्ते, माता-पिता से बढ़ती दूरी और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता का प्रभावी संदेश दिया गया।


प्रधानाध्यापक ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष के वार्षिक महोत्सव की थीम “रंगों का अभिमान” रखी गई है, जो यह दर्शाती है कि भारत विविध संस्कृतियों, परंपराओं और मूल्यों का देश है। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चे भावनात्मक रूप से माता-पिता से दूर होते जा रहे हैं, जिसे लेकर विद्यार्थियों ने संवेदनशील प्रस्तुतियां दीं। साथ ही नशे के दुष्प्रभावों पर आधारित कार्यक्रमों के जरिए समाज को जागरूक करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के दौरान स्कूल प्रबंधन द्वारा मेधावी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर बच्चों के चेहरों पर आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति नई उम्मीद साफ झलक रही थी।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में द टचवुड स्कूल के प्रबंध निदेशक डॉ. यूनुस चौधरी, स्कूल प्रबंधक फारूक अहमद चौधरी और पूर्व कोतवाल विजय चौधरी उपस्थित रहे।
डॉ. यूनुस चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि द टचवुड स्कूल में शिक्षक बच्चों की शिक्षा को लेकर अत्यंत संवेदनशील हैं और यहां जिस प्रकार की मूल्य आधारित शिक्षा दी जा रही है, वह बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास में सहायक है। उन्होंने शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में इसी स्कूल से आईएएस, आईपीएस और देश-प्रदेश को दिशा देने वाले अधिकारी निकलेंगे, जो न केवल स्कूल बल्कि काशीपुर और उत्तराखंड का नाम रोशन करेंगे।वहीं पूर्व कोतवाल विजय चौधरी ने भी छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज को सही दिशा देने का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने स्कूल प्रबंधन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान ही एक मजबूत और जागरूक समाज की नींव रखते हैं।
“रंगों का अभिमान” केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह संदेश था कि
👉 शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए
👉 संस्कार, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है
👉 बच्चे ही देश का भविष्य हैं, और उन्हें सही दिशा देना हम सबकी जिम्मेदारी है
द टचवुड स्कूल का यह वार्षिक महोत्सव शिक्षा के साथ सामाजिक चेतना का ऐसा संगम बनकर उभरा, जो लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

RIZWAN AHSAN

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