काशी मे महात्मा गाँधी को स्मरण कर उनके पुण्यतिथि पर मनाया गया स्वराज दिवस

वाराणसी :- स्वराज किसी प्रकार के स्वतंत्रता की माँग नहीं है अपितु खुद को नियंत्रित कर स्वालम्बन हेतु चलाने वाली राष्ट्रव्यापी जागरूक आंदोलन था और आज भी इसका यही उद्देश्य है | आज मनुष्य स्वयं का ही शत्रु बन चूका है वो अच्छे एवं बुरे मे फर्क करने मे पूर्तिणः असमर्थ है जिस प्रकार बादलो का एक समान रंग निर्जल प्रतीत होता है किन्तु उसमे रंग भर जाने मात्र से वो इंद्रधनुष का रूप ले सकता है उसी प्रकार मनुष्य के जीवन मे भी इंद्रधनुष के सात रंगो वाली सात सत्यकर्म किसी के भी जीवन को सार्थक बना सकता है वो सात सत्कर्म है सत्य,सुख,शान्ति,सदभाव,सदाचार, संवेदना अथवा सद्गुण |
इनके सृजन के भावना से ही आज महात्मा मोहन दास करम चंद्र गाँधी के पुण्यतिथि को “स्वराज दिवस” के रूप मे मनाते हुऐ सात दिपो को प्रज्जवलित कर किया गया है | काशीका फाउंडेशन के संस्थापक विनय कुमार चौरसिया एवं उनके सहयोगियों द्वारा समाज मे घर ही हिंसा का मौजूदा केंद्र बना हुआ है घरेलू हिंसा एवं मानसिक उत्पीड़न के रूप मे तों क्या भाई,भाई का कत्ल कर दे | इस स्तिथि मे तों क्या गाँधी जी का अहिंसा का उपदेश “अहिंसा परमो धर्मः” मिथ्या मात्र तों नहीं हो सकता है |
आज के बदलते परिवेश मे लोगो की जरूरते ऐसे बदल रहे है जैसे वे जरूरते देश एवं आने वाले पीढ़ी से बढ़कर हो | ऐसी विकृत मानसिकता वाले भिन्न भिन्न विचारों से परिपूर्ण समाज मे ग़र कोई महात्मा समग्र विश्व को सद्बुद्धि का दर्शन करा सकता है तों वो स्वयं हमारे राष्ट्रपिता महात्मा मोहन दास करम चंद्र गाँधी ही हो सकते है | इस स्तिथि मे हमें आज का दिन उनकी पुण्यतिथि दिवस के रूप मे नहीं अपितु उनके विचारों को पूर्ण शक्ति के साथ विश्व पटल पर लाना चाहिये और ये भी समीक्षा करनी चाहिये कि ये शब्द कितनी सर्वभावमिक सत्य ही है और हम सभी को आज का दिन स्वराज दिवस के रूप याद कर उत्साह पूर्वक एक त्यौहार के रूप मनाना चाहिये जिससे आने वाली पीढ़ी भी उनके शब्दो द्वारा दी गयी शिक्षा एवं समझ प्रेरित हो सत्कर्म,सदभाव, सदाचार इत्यादि के मार्ग पर अग्रसित हो स्वदेश हित कर्म कर सके |
विनय स्वयं गाँधी जी के चरखे जैसे मशीनरी विजन से काफ़ी प्रभावित है जो चरखा से हथकरघा तक के स्वदेशी रोजगार बनारसी साड़ी के रूप मे सृजित करता है जिसमे न्यूनतम मशीनरी कारीगिरी से लेकर अधिकतम रोजगार के अवसरो का सृजन कर सकती है किन्तु हमारे भौवतिकी आवश्यकता मानवीय जरूरतों से कही ऊची हो चुकी है जिस वजह से हम सब मशीनों के गुलाम बन गये है | विनय कुमार चौरसिया ने दिव्यांगों के लिये कई कार्यक्रम करा चूके जैसे सुगम्य भारत के तहत व्हील चेयर डोनेशन,दिव्यांगों मे मतदाता जागरूक कार्यक्रम,ब्लड डोनेशन,काशी मे दिव्यांगों के खेलो को लेकर उन्हें प्रोत्साहित करना शतरंज इत्यादि कार्यक्रमो द्वारा पहल कर चूके है | इसी शक्ति की उपासना के मनोकामना की इच्छा से सभी ने हमारे कार्यालय मे अपने तरफ एक एक दीप प्रज्जवलित एवं पुष्प अर्पित कर किये जिनमे मुख्य रूप से शामिल रहे |
कार्यक्रम मे विनय कुमार चौरसिया (संस्थापक),मीरा राय,अतुल राय,बबीता चौरसिया,अनीता शाही,विक्रांत सिंह, जाहिर,समशेर पटेल,धीरेन्द्र प्रकाश शुक्ला,दीक्षा श्रीवास्तव इत्यादि उपस्थिति रहे | पूरे कार्यक्रम मे शास्त्रीय संगीत एवं दिव्यांगों मे खेल को बढ़ावा देने के लिये शतरंज के खेल का आयोजन भी रखा गया था ||






