वाराणसी/उत्तरप्रदेश
उच्चतम न्यायालय द्वारा हर उस कानून को शून्य व असंवैधानिक घोषित करना चाहिए जो समाज की एकता,अखंडता को भंग करता हो- अजय सिंह (बागी),वरिष्ठ अधिवक्ता

वाराणसी :- देश के किसी भी विश्वविद्यालय महाविद्यालय या शैक्षणिक संस्थान में इस तरह के कानून के प्रावधानों को लागू करना संविधान के मूल आधार को ठेस पहुंचाने जैसा है जहां संविधान के मौलिक अधिकार में यह प्रावधान है की जाति के आधार पर किसी भी तरीके का भेदभाव किसी भी महाविद्यालय,विश्वविद्यालय,शैक्षणिक संस्था में नहीं कर सकते हैं वहीं पर संसद द्वारा एक ऐसा काला कानून पारित किया जाता है जिसमें स्वर्ण वर्ग के विरोध में हर एक प्रावधान बनाए गए हैं | यूजीसी का जो नया नियम पारित हुआ है वह भेदभाव और असमानताओं को मिटाने की जगह या कम करने की जगह उसको बढ़ावा देने का कार्य करेगा जिससे समाज की एकता, अखंडता पर नकरात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता हैं ||





