ईरान के रण में फँसा सहारनपुर का लाल हमले के बाद बंद हुआ तेहरान एयरपोर्ट, वतन वापसी की राह देख रहा बरकत

दीनी तालीम लेने ईरान गए नानौता के युवक की सुरक्षा को लेकर परिजन चिंतित, सरकार से लगाई मदद की गुहार!
जनपद सहारनपुर
पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों ने सात समंदर पार सहारनपुर के एक घर में कोहराम मचा दिया है। जनपद के कस्बा नानौता के मोहल्ला कानूनगोयान (सब्जवारियान) निवासी बरकत अली (25 वर्ष), जो ईरान में दीनी तालीम हासिल करने गए थे, अब वहां के बिगड़ते हालातों के बीच फंस गए हैं। जाफर अब्बास के पुत्र बरकत अली पिछले करीब चार वर्षों से ईरान के मशहद शहर स्थित एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में दीनी तालीम (धार्मिक शिक्षा) ले रहे हैं। जून 2025 में वह तीन महीने की छुट्टी लेकर घर आए थे और अपनी पढ़ाई का अंतिम वर्ष पूरा करने के लिए वापस ईरान लौट गए थे। लेकिन किसे पता था कि चंद महीनों बाद ही वहां युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। परिजनों के अनुसार, इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर संभावित हमलों की खबरों के बाद उन्होंने बरकत को तुरंत घर लौटने की सलाह दी थी। बरकत ने घर आने की कोशिश भी की और वह मशहद से लगभग 400 किलोमीटर का सफर तय कर तेहरान एयरपोर्ट पहुंचा। बरकत जब एयरपोर्ट पहुंचा, तब तक वहां की स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी थी। सुरक्षा कारणों से तेहरान एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया और उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिसके कारण बरकत न तो टिकट ले सका और न ही वहां से निकल पाया।जाफर अब्बास ने बताया कि रविवार सुबह करीब 4 बजे बेटे से आखिरी बार बात हुई थी। तब उसने बताया था कि वह ठीक है लेकिन डरा हुआ है। सोमवार को जब परिजनों ने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो वहां इंटरनेट सेवाएं बाधित होने के कारण बात नहीं हो सकी। बेटे से संपर्क न हो पाने के कारण परिवार गहरे सदमे में है और मां-बहनें लगातार उसकी सलामती की दुआएं मांग रही हैं।परिजनों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इजरायल और अमेरिका की ओर से तेहरान और उसके आसपास के इलाकों को निशाना बनाए जाने की खबरें आ रही हैं। बरकत फिलहाल इसी क्षेत्र में फंसा हुआ है। स्थानीय लोगों और परिजनों ने अब भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से अपील की है कि वहां फंसे भारतीय छात्रों की सुरक्षित घर वापसी के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं।




























