आस्था पर सवाल

आस्था पर प्रहार या सच को दबाने की कोशिश! स्वामी प्रकाशानंद महाराज की ये न्याय की गुहार, हर सनातनी के दिल को झकझोर देने वाली है।
मुंबई (इंद्र यादव) प्रयागराज से एक बड़ी खबर सामने आ रही है! आवाहन अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी प्रकाशानंद महाराज अब खुलकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के समर्थन में उतर आए हैं। महाराज जी का यह बयान वर्तमान व्यवस्था और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
महाराज जी की मुख्य बातें!
उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच उत्तर प्रदेश से बाहर किसी ऐसे राज्य में कराई जाए जहाँ भाजपा की सरकार न हो।
स्वामी प्रकाशानंद महाराज को अंदेशा है कि यूपी पुलिस के दबाव में होने के कारण निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
संत समाज का मानना है कि धर्म और न्याय के मामले में राजनीति का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
सोचने वाली बात यह है… क्या आज के समय में संतों को अपनी बात रखने के लिए भी ‘सफेदपोशों’ और ‘खाकी’ के डर से गुजरना होगा? अगर मामला धर्म और मर्यादा का है, तो जांच में पारदर्शिता की मांग करना हर नागरिक और संत का अधिकार है।
अखाड़ा परिषद और संत समाज के बीच का यह मतभेद अब एक नया मोड़ ले चुका है। क्या आप स्वामी प्रकाशानंद महाराज की इस मांग से सहमत हैं कि जांच किसी गैर-भाजपा शासित राज्य में होनी चाहिए!
























