आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की कृपा हमेशा इसी संस्थान पर रही है – निर्यापक मुनिश्री समता सागर

वाराणसी :-निर्यापक मुनिश्री समता सागर महाराज,मुनिश्री पवित्र सागर महाराज मुनिश्री पूज्य सागर महाराज मुनिश्री अतुलसागर महाराज स संघ तथा ज्येष्ठ आर्यिका रत्न गुरुमति माताजी एवं आर्यिकारत्न दृणमतिमाताजी ने स संघ नरिया दि.जैन मंदिर एवं श्री गणेश प्रसाद बर्णी संस्थान में पधारे एवं संपूर्ण क्षेत्र का निरीक्षण किया तथा संस्थान के कक्ष को देखा एवं सभी दृष्टिओं तथा पदाधिकारियों को आशीर्वाद प्रदान किया |
इस अवसर पर मुनिश्री ने कहा कि आज प्रातःकाल भेलूपुर मंदिर से नरिया मंदिर जाते समय खुजवां जिनालय की बंदना की यंहा पर भगवान श्री अजितनाथ मूलनायक के रुप में विराजमान है आकर के बहुत अच्छा लगा बहुत ही मनोज्ञ प्रतिमा है ऐसे जिन विम्वों के दर्शन करने से विशुद्धता आती है वह सम्यकदर्शन का कारण बनता है उन्होंने कहा कि जिन वंधुओं ने इस मंदिर को तैयार किया है वह सभी आशीर्वाद के पात्र है |
इसके पश्चात मुनिसंघ एवं आर्यिका संघ नरियां दिगम्वर जैन मंदिर पहुंचे इस अवसर पर मुनिश्री समतासागर महाराज ने कहा कि बनारस से हमारे गुरुदेव आचार्य विद्यासागर जी महाराज के गुरु आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज का गहरा सम्वंध रहा है उन्होंने अपने ग्रहस्थ जीवन का भाग इसी बनारस नगरी में गुजारा है उनकी अध्यन में बहूत रुची थी वह बहुत स्वाभिमानी व्यक्तित्व के धनी थे समाज ने उनको सहायता प्रदान करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया बल्कि यंहा पर गमछा बेचकर अपना गुजारा किया मुनिश्री ने कहा कि नरिया मंदिर आकर के मुख्य मंदिर एवं 24 जिनालय एवं समवसरण मंदिर के दर्शन किये बहूत अच्छा लगा |
मुनिश्री पवित्र सागर जी एवं मुनिश्री पूज्य सागर मुनिश्री अतुल सागर स संघ तथा ज्येष्ठ आर्यिका रत्न गुरुमति माताजी एवं दृणमति माताजी स संघ संस्थान में पधारी उन्होंने संस्थान के कक्ष को देखा एवं सभी टृस्टीओं तथा पदाधिकारियों को आशीर्वाद प्रदान किया तथा यही से आहार चर्या संपन्न हुई,यंहा पर संस्थान के प्रोफेसर अशोक कुमार जैन ने बताया इस संस्थान को पंडित फूलचंद सिद्धांत शास्त्री ने स्थापित किया यंहा पर बड़े बड़े मौलिक ग्रंथों का तथा सिद्धांत ग्रंथों तथा व्याख्यान माला का आयोजन निरंतर चलता रहता है इस अवसर पर मुनिश्री समतासागर महाराज ने कहा कि बनारस से हमारे गुरुदेव आचार्य विद्यासागर जी महाराज के गुरु आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज का गहरा सम्वंध रहा है उन्होंने अपने ग्रहस्थ जीवन का भाग इसी बनारस नगरी में गुजारा है उनकी अध्यन में बहुत रुची थी वह बहुत स्वाभीमानी व्यक्तित्व के धनी थे समाज ने उनको सहायता प्रदान करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया बल्कि यंहा पर गमछा बेचकर अपना गुजारा किया मुनिश्री ने कहा कि नरिया मंदिर आकर के मुख्य मंदिर एवं 24 जिनालय एवं समवसरण मंदिर के दर्शन किये बहुत अच्छा लगा |
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि संघ तथा आर्यिका संघ ने संस्थान के कक्ष को देखा एवं सभी दृष्टिओं तथा पदाधिकारियों को आशीर्वाद प्रदान किया दोपहर में सामायिक उपरांत म्यूजियम तथा बीएचयू का अबलोकन किया ||






