वाराणसी/उत्तरप्रदेश

आईएमएस-बीएचयू में NCAIHC-2026 का शुभारंभ: स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के नैतिक एवं जमीनी स्तर पर एकीकरण पर जोर

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वाराणसी । आईएमएस-बीएचयू में NCAIHC-2026 का शुभारंभ: स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के नैतिक एवं जमीनी स्तर पर एकीकरण पर जोर
कृत्रिम बुद्धिमत्ता कोई विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है; किंतु आज स्वास्थ्य सेवाओं में इसके उपयोग के संदर्भ में सुरक्षा, जिम्मेदारी और नैतिकता सर्वोपरि – श्रीमती अनुप्रिया पटेल
स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब जमीनी स्तर पर हो प्रौद्योगिकी का प्रयोग – प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी
वाराणसी, 15.02.2026: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित चिकित्सा विज्ञान संस्थान के के. एन. उडुपा सभागार में रविवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थ केयर एंड एजुकेशन (NCAIHC-2026) का उद्घाटन किया गया। तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “विकसित भारत: ट्रांसफॉर्मिंग हैल्थ एंड लर्निंग” (NCAIHC-2026)” विषय पर आयोजित किया गया है, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, चिकित्सकों, नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं ने सहभागिता की।
उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि माननीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री, भारत सरकार, श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता “विकसित भारत 2047” की परिकल्पना और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य के केंद्र में है। उन्होंने कहा कि 146 करोड़ की जनसंख्या और लगभग 20% वैश्विक रोग-भार वहन करने वाले भारत के लिए एआई कोई विलासिता नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक तक सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने की ज़रूरत है। उन्होंने रोग निगरानी, रोकथाम, निदान और उपचार तक स्वास्थ्य सेवाओं की संपूर्ण श्रृंखला में एआई के एकीकरण के प्रयासों का उल्लेख करते हुए टेलीमेडिसिन विस्तार, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन तथा भारत-केंद्रित, किफायती एवं स्केलेबल एआई समाधानों के विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बल दिया कि एआई की परिवर्तनकारी क्षमता के साथ मजबूत नियामकीय ढांचा, डेटा गोपनीयता, पारदर्शिता और स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता-वृद्धि अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई चिकित्सकों का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सहायता के लिए है, और इसका उपयोग सुरक्षित, जिम्मेदार एवं नैतिक तरीके से किया जाना चाहिए।
अपने संबोधन में कुलपति अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि अब समय केवल चर्चा का नहीं, बल्कि आईएमएस-बीएचयू की स्वास्थ्य प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रत्यक्ष, उत्तरदायी और संरचित एकीकरण का है। उन्होंने एआई के सुरक्षित एवं नियामकीय मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन हेतु एक समर्पित टास्क फोर्स के गठन का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ तैयारी, प्रशिक्षण और सक्रिय सीखने की संस्कृति आवश्यक है। यह रेखांकित करते हुए कि किसी भी सम्मेलन का वास्तविक महत्व विचारों को कार्य में परिणत करने में है, उन्होंने विश्वविद्यालय के रीजनल एवं टेलीमेडिसिन केंद्रों की भूमिका पर प्रकाश डाला, जो एआई के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच का विस्तार कर सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि कोई भी मरीज सामान्य नहीं होता और प्रत्येक व्यक्ति समान देखभाल का अधिकारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईएमएस-बीएचयू जमीनी स्तर पर प्रभावी तकनीकी अपनाने के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य मानक स्थापित कर सकता है।
विशिष्ट अतिथि, उत्तर प्रदेश सरकार में माननीय आयुष राज्य मंत्री दया शंकर मिश्र ने कहा कि सर सुन्दर लाल चिकित्सालय अत्यधिक दबाव में कार्य करते हुए न केवल वाराणसी, बल्कि पूर्वांचल एवं पड़ोसी राज्यों के विशाल क्षेत्र को सेवाएँ प्रदान कर रहा है। 1922 से चली आ रही इसकी ऐतिहासिक विरासत और प्रतिदिन हजारों मरीजों की निर्भरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकों को अपनाना दक्षता, रोगी प्रबंधन और सेवा गुणवत्ता सुधार के लिए आवश्यक है। उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया कि तकनीकी प्रगति को अपनाते समय करुणा, धैर्य और मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखें।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की निदेशक सुश्री रीना आशीष विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। सम्मेलन का शुभारंभ चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक एवं आयोजन अध्यक्ष प्रो. एस. एन. संखवार के स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने विषय की प्रासंगिकता और उत्तरदायी नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया। उद्घाटन सत्र में सम्मेलन स्मारिका का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शशि प्रकाश मिश्रा एवं डॉ. साक्षी अग्रवाल द्वारा किया गया। सम्मेलन के संयोजक एवं आरआरसी-ईस्ट टेलीमेडिसिन के समन्वयक अमित मिश्रा ने आयोजन की समग्र रूपरेखा और सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में आयोजन सचिव डॉ. निलेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिनिधियों एवं आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन में टेलीमेडिसिन, ई-संजीवनी, एआई-आधारित डायग्नोस्टिक्स, टेली-एजुकेशन, टेली-एविडेंस, मेडिकल कॉलेज नेटवर्किंग तथा डिजिटल हेल्थ गवर्नेंस जैसे विषयों पर प्लेनरी व्याख्यान, तकनीकी सत्र, पैनल चर्चा एवं कार्यशालाएँ आयोजित की जा रही हैं।

Sallauddin Ali

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