आईआईटी बीएचयू में कार्डियक वेलनेस वर्कशॉप जीवनरक्षक कौशलों का सशक्तिकरण 2026 विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला हुआ सम्पन्न

वाराणसी:- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में 29 –30 जनवरी 2026 को कार्डियक वेलनेस वर्कशॉप जीवनरक्षक कौशलों का सशक्तिकरण 2026 विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया | इस कार्यशाला का आयोजन मानविकी अध्ययन विभाग, आईआईटी बीएचयू द्वारा स्किल सेंटर, चिकित्सा विज्ञान संस्थान आईएमएस बीएचयू के सहयोग से किया गया | कार्यशाला का उद्देश्य कार्डियक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा प्रतिभागियों को आवश्यक जीवनरक्षक कौशलों से सशक्त बनाना था |
कार्यशाला के प्रथम दिवस का शुभारंभ प्रो.अमित पात्रा निदेशक आईआईटी बीएचयू के संरक्षण में आयोजित उद्घाटन सत्र से हुआ | उद्घाटन समारोह में प्रो. एस.एन.संखवार निदेशक आईएमएस बीएचयू मुख्य अतिथि के रूप में तथा प्रो. ए.के.नेमा महासचिव विश्वविद्यालय खेल बोर्ड एवं पूर्व अधिष्ठाता,छात्र कल्याण बीएचयू विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे | अपने संबोधनों में दोनों गणमान्य अतिथियों ने कार्डियक वेलनेस, सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) एवं प्राथमिक उपचार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आपातकालीन परिस्थितियों में ये तकनीकें जीवन रक्षक सिद्ध होती हैं |
प्रथम दिवस के तकनीकी सत्रों का संचालन प्रो.राजेश कुमार मीणा (प्रोफेसर इनचार्ज,स्किल सेंटर आईएमएस बीएचयू) एवं प्रो.कविता मीणा (एनेस्थीसिया विभाग आईएमएस बीएचयू) द्वारा किया गया | इन सत्रों में मैनिक्विन के माध्यम से सीपीआर का व्यावहारिक प्रशिक्षण,सुरक्षा सावधानियाँ तथा हृदय संबंधी आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की विधियों पर विस्तृत प्रदर्शन किया गया | प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण सत्रों में सक्रिय सहभागिता की |
कार्यशाला के द्वितीय दिवस में उन्नत जीवन रक्षक एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया | इस दिन के सत्रों में चोकिंग (दम घुटने की स्थिति) का प्रबंधन,ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) का संचालन एवं उपयोग तथा विभिन्न परिस्थितियों में प्राथमिक उपचार के अनुप्रयोग पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया | विशेषज्ञों द्वारा दिए गए प्रदर्शन एवं पर्यवेक्षित अभ्यास सत्रों ने प्रतिभागियों को वास्तविक जीवन की आपात स्थितियों से निपटने हेतु आत्मविश्वास एवं दक्षता प्रदान की और आज की कार्यशाला का संचालन डॉ जे पी मिश्रा के संरक्षण में हुआ |
इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के विभिन्न भागों से 500 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की जिनमें से 200 से अधिक प्रतिभागियों ने मैनिक्विन एवं आपातकालीन उपकरणों के माध्यम से प्रत्यक्ष व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया | यह सहभागिता कार्यशाला की राष्ट्रीय स्तर की व्यापकता एवं प्रभाव को दर्शाती है |
कार्यशाला का सफल समन्वय डॉ.सतीश कनौजिया,आयोजन सचिव द्वारा किया गया जिसमें डॉ.कविता वर्मा सहायक आयोजन सचिव तथा मानविकी अध्ययन विभाग आईआईटी (बीएचयू) के संकाय सदस्यों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ | कार्यशाला के दौरान मुख्य अतिथि एवं संसाधन व्यक्तियों को आयोजन समिति द्वारा स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया |
कार्यक्रम में मानविकी अध्ययन विभाग आईआईटी बीएचयू के कई वरिष्ठ शिक्षक एवं सदस्य उपस्थित रहे जिनमें प्रो.पी.के. पांडा,प्रो.अजीत कुमार मिश्रा,प्रो. महोबिया,प्रो.विनिता चंद्रा,डॉ.शैल शंकर, डॉ.अनिल ठाकुर,डॉ.मनहर चरण,डॉ. अमृता द्विवेदी डॉ.ताराचंद,डॉ.विश्वजीत सरदार और डॉ.विजय वर्मा प्रमुख रूप से शामिल थे और इस राष्ट्रीय कार्यशाला को सफल बनाने में आयोजन समिति के सदस्य करन,अमन,विशाल,मनोहर,मोहन, मिहिर,वसुंधरा,सिद्धि,मीठी,इशिता, मधुलिका,शबनम,विदुषी और अन्य शोधार्थी उपस्थित रहे |
कार्यक्रम का समापन द्वितीय दिवस को आयोजित समापन सत्र एवं डॉ.शैल शंकर,कोषाध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ | यह दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला प्रतिभागियों को कार्डियक आपात स्थितियों की पहचान,प्रभावी सीपीआर प्रदान करने, चोकिंग प्रबंधन,AED के उपयोग तथा त्वरित प्राथमिक उपचार देने में सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई | यह कार्यशाला समाज में हृदय स्वास्थ्य जागरूकता एवं आपातकालीन परिस्थितियों में तत्परता की संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है ||






