वाराणसी/उत्तरप्रदेश

आइसार्क में धान नीतियों पर उच्च स्तरीय नीति संवाद का होने जा रहा आयोजन

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भारत में टिकाऊ एवं सुदृढ़ धान प्रणाली के लिए नीतिगत सुधारों पर होगी चर्चा

   वाराणसी। अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान, दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क), भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद के सहयोग से, 7–8 मार्च, 2026 को आइसार्क, वाराणसी में दो दिवसीय उच्च स्तरीय नीति संवाद का आयोजन करने जा रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “भारत में टिकाऊ एवं सुदृढ़ धान प्रणाली के लिए नीतियों की पुनर्गठन-सीख एवं प्राथमिकताएँ है।
   इस दो दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता, शोधकर्ता, विकास सहयोगी संस्थाएँ, निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि तथा किसान भाग लेंगे। इसमें भारत की वर्तमान धान नीति की समीक्षा की जाएगी और भविष्य के लिए आवश्यक सुधारों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस संवाद में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे, जिनमें मुख्यमंत्री के सलाहकार, कृषि उत्पादन आयुक्त तथा प्रमुख सचिव शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों, विकास संगठनों तथा निजी क्षेत्र की कंपनियों, जिनमें बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भी शामिल हैं व उनके प्रतिनिधि भी इस संवाद में सहभागिता करेंगे।
  धान भारत की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका और कृषि अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है। भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक और प्रमुख उत्पादक देश होने के कारण वैश्विक चावल बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान में भूजल स्तर में गिरावट, बढ़ती उत्पादन लागत और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न अस्थिरता जैसी चुनौतियाँ धान प्रणाली की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर रही हैं। इन परिस्थितियों में वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित नीतिगत सुधार और जलवायु-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देना आवश्यक हो गया है। यह संवाद नीति-निर्माताओं और संबंधित पक्षों को सुधार के संभावित रास्तों पर गहन चर्चा का मंच प्रदान करेगा।
  आइसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने कहा कि यह संवाद नीति निर्माताओं और अन्य प्रमुख हितधारकों को संभावित सुधारों के मार्गों पर विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। चर्चा के प्रमुख विषयों में धान बाजार एवं व्यापार, पर्यावरणीय स्थिरता, तथा जलवायु-अनुकूल तकनीकों - जैसे धान की सीधी बुआई (डीएसआर) का विस्तार शामिल होगा, जिसमें पानी की खपत और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने, उत्पादन लागत घटाने और कृषि प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाने की क्षमता है।
   कार्यक्रम में मुख्य व्याख्यान, विशेषज्ञ पैनल चर्चा और विभिन्न हितधारकों के परामर्श सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य प्रमाण-आधारित नीति निर्माण को सुदृढ़ करना और संस्थागत समन्वय को मजबूत बनाना है, ताकि देशभर में टिकाऊ धान आधारित कृषि प्रणाली को बढ़ावा दिया जा सके।
Sallauddin Ali

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