स्वदेश निर्मित नैनो टेक्नोलॉजी से बनी नैनो यूरिया के प्रयोग पर विशेष जोर दिया – गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह
नगीना। जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह ने द्वारिकेश चीनी मिल बुंदकी में गन्ना कृषि प्रशिक्षण में स्वदेश निर्मित नैनो टेक्नोलॉजी से बनी नैनो यूरिया के प्रयोग पर विशेष जोर दिया। डीसीओ ने बाद में गांव जाकर महिला उद्यमियों द्वारा संचालित महिला स्वयं सहायता समूह का भी निरीक्षण किया।
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह ने द्वारिकेश चीनी मिल बुंदकी के क्लब भवन में मिल के गन्ना अधिकारियों व गन्ना पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण देते हुए बताया कि वर्तमान समय आधुनिक कृषि का है।
आज के समय यूरिया खाद के प्रयोग करने जगह स्वदेश निर्मित नैनो टेक्नोलॉजी से बनी नैनो यूरिया का खेती में प्रयोग आसान व लाभकारी भी है। यह एक अनोखा उत्पाद है जो इफको व अन्य स्वदेशी कम्पनीयो द्वारा विश्व में पहली बार विकसित किया गया है।
यह इफको नैनो यूरिया (तरल) नैनो तकनीक पर आधारित भारत सरकार द्वारा अनुमोदित एक ऐसा उत्पाद है जो पानी के साथ मिलाकर खड़ी फसल पर छिड़काव कर देने से फसल को नाइट्रोजन की आपूर्ति करता है जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।
यह यूरिया बोरी की तुलना में सस्ता व प्रभावी उत्पाद है। नैनो यूरिया की एक बोतल 500 एमएल एक बोरी यूरिया 45 किलो के समक्ष कार्य करती है। उन्होंने मिल के अधिकारियों से क्षेत्रीय किसानों को इस उत्पाद की गुणवत्ता व लाभों के बारे में जागरूक करने की सलाह दी।
इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक शैलेंद्र सिंह ने बताया कि कम नाइट्रोजन चाहने वाली फसलों में मात्र दो एमएल और अधिक नाइट्रोजन चाहने वाली फसलों को चार मिली प्रति लीटर पानी के साथ छिड़काव करना चाहिए। एक एकड़ खेत के लिए 500 एमएल की बोतल 125 से 250 लीटर पानी के साथ पर्याप्त होती है। गन्ना विकास परिषद बुंदकी- नगीना के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अविनाश चंद्र तिवारी ने बताया कि नैनो यूरिया को लेकर इसके लाभों के बारे में किसानों को बताने के लिए परिषद की ओर से टीमों टीमों का गठन किया गया है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मिल उपाध्यक्ष (वर्क्स) केपी सिंह, मुख्य महाप्रबंधक (गन्ना प्रशासन) रमेश परशुरामपुरिया, महाप्रबंधक (गन्ना क्रय) रतन सिंह, सहकारी गन्ना विकास समिति नगीना के सचिव विजयपाल सिंह आदि में भी अपने विचार रखे।
इसके बाद जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह ने ग्राम नकीपुर में गन्ने की उन्नतशील पौध तैयार करने वाली महिला उद्यमियों द्वारा संचालित महिला स्वयं सहायता समूह का भी निरीक्षण किया और समूह की महिलाओं के परिश्रम की प्रशंसा की।
विकास अग्रवाल की रिपोर्ट


















