नहटौर में बाबा रहीमुद्दीन शाह की मजार पर कव्वाली मुकाबले का शुभारम्भ
नहटौर – धामपुर मार्ग स्थित बाबा रहीमुद्दीन शाह की मजार पर आयोजित सालाना उर्स के अंतिम दिन कव्वाली मुकाबले का शुभारम्भ चेयरपर्सन प्रतिनिधि राजा अंसारी ने फीता काटकर तथा समाजसेवी सिकन्दर इकबाल ने शमा रोशन कर किया। इस अवसर पर राजा अंसारी ने कहा कि बाबा रहीमुद्दीन शाह की मजार पर आयोजित होने वाला पारम्परिक सालाना उर्स नहटौर की गंगाजमुनी तहजीब का परिचायक है। ऐसे आयोजनों से समाज में भाईचारे का संदेश जाता है।
समाजसेवी सिकन्दर इकबाल ने कहा कि हिन्दुस्तान की एकता व अखण्ता को कायम रखने में सूफी संतों का विषेश योगदान रहा है। सूफी संतों ने हमेशा इंसान को इंसानियत के नजरिये से देखने की सीख दी। इसलिये लोग आज भी उन्हें सम्मान देने के लिये इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। कार्यक्रम संचालक वरिष्ठ पत्रकार सलीम सिद्दीकी ने कहा कि उर्दू दुनिया की इकलौती जुबान है जिसमे बेइंतेहा मिठास है लेकिन आज यह जुबान विलुप्त होती जा रही है। यहाँ तक कि मुस्लिम समाज के बच्चे भी उर्दू जुबान में बोलना पंसद नहीं करते। आज यह जुबान केवल शायरों और कव्वालों पर सिमट कर रह गई है।
उन्होंने लोगों खासकर मुसलमानों से अपने बच्चों को उर्दू जुबान सिखाने पर जोर दिया। इसके बाद कब्बाल शाहनवाज साबरी (मेरठ) तथा जैबर आली (कानपुर) के बीच शानदार कव्वाली मुकाबला हुआ। जिसका दर्शकों ने देर रात तक लुत्फ़ उठाया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कमेटी अध्यक्ष छुट्टन ठेकेदार, डॉ.ज़ैद बिन हफीज, बदर अली, सलीम सिद्दीकी आदि का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में छोटे फरीदी, मुजम्मिल, शमसीर पोंटिग, जीशान अंसारी, नदीम अहमद, शादाब अंसारी, खुर्शीद मंसूरी आदि गणमान्य सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। अंत में समापन अवसर पर कमेटी अध्यक्ष छुट्टन ठेकेदार ने सभी का आभार जताया।
महकार सिंह तोमर की रिपोर्ट


















