भोपाल: अस्पतालों की निर्ममता, अमानवीयता और अंधाधुंध वसूली पर अब क्षेत्रीय थाने नजर रखेंगे। पीड़ित व्यक्ति अपनी शिकायत पुलिस को कर किसी भी तरह की अव्यवस्था के लिए इंसाफ की गुहार लगा सकेंगे। इसके लिए गृह मंत्रालय ने प्रदेश भर के थानों को तैनात कर दिया है।
राजधानी भोपाल में इलाज के लिए बड़ा बिल थमाने और वसूली के लिए शव न सौंपने के मामले ने अस्पतालों की धांधली को उजागर करना शुरू कर दिया है। इस मामले के बाद राजधानी के चार बड़े अस्पताल कार्यवाही का शिकार हुए हैं। इसके बाद गृह मंत्रालय ने मामला अपने हाथों में लेते हुए लूटमार करने वाले ऐसे अस्पतालों पर कार्यवाही की तैयारी शुरू कर दी है। गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार को कहा है कि ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई सतत जारी रहेगी।
इसके लिए प्रदेशभर के पुलिस थानों को अधिकार दे दिए गए हैं। अस्पतालों से पीड़ित लोग अपने संबंधित क्षेत्रों के थानों पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। मिश्रा ने एंबुलेंस संचालकों द्वारा वसूल की जा रही मनमानी रकम को लेकर भी नाराजगी जताई है। उन्होंने इनके खिलाफ कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं।
इसलिए बने हालात
राजधानी के Covid अस्पतालों में मरीजों से बेड, इंजेक्शन, दवाओं और ऑक्सिजन के नाम पर जमकर लूटमार करने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। महामारी में बने स्वास्थ्य संकट का फायदा गली मोहल्ले में स्थित छोटे अस्पताल भी उठाने से नहीं चूक रहे हैं। महंगे खर्च और लंबे इलाज के बाद भी लोगों के हाथों में परिजन की लाशें आ रही हैं। जिसको लेकर लगातार विवाद के हालात बन रहे हैं।
इधर एक और भ्रष्टाचार के संकेत
अस्पतालों के खिलाफ शिकायत और उन पर कार्यवाही करने के पुलिस को अधिकार की व्यवस्था को कुछ लोग भ्रष्टाचार के नए रास्ते शुरू होने से जोड़ रहे हैं। एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर के जावेद बेग का कहना है कि पुलिस कार्यवाही से अस्पताल प्रबंधन में खोफ तो जरूर पैदा होगा, लेकिन पुलिस और अस्पतालों के गठजोड़ की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। इन सबके बीच नुकसान में मरीज और परिजन ही रहने वाले हैं।
रिपोर्ट खान आशु


















